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हृदय रोग के साथ समय से पूर्व पैदा हुई बच्ची का पारस ब्लिस हॉस्पिटल में सफलतापूर्वक इलाज

हृदय रोग के साथ समय से पूर्व पैदा हुई बच्ची का पारस ब्लिस हॉस्पिटल में सफलतापूर्वक इलाज

पंचकूला, 13 जून, 2018: तय समय से पहले और जन्म से ही हृदय रोग से पीड़ित एक बच्ची का सफल इलाज पारस ब्लिस हॉस्पिटल, एमडीसी में किया गया। बच्ची के माता-पिता श्रीमती जनक शर्मा और नरेंद्र कुमार जम्मू से आए थे।

डॉ. सौरभ गोयल, कंसल्टेंट, नियोनैटोलॉजी, पारस ब्लिस हॉस्पिटल ने बताया कि 15 दिन की प्रीटर्म बच्ची 36वें सप्ताह में ही पैदा हुई थी और उसे जब पारस ब्लिस हॉस्पिटल में लाया गया था तो उसका वजन सिर्फ 2.1 किलोग्राम ही था। शुरुआत में उसे सांस प्रणाली के फेल होने से पीड़ित बताया गया। बच्ची को अस्पताल में दाखिल करनेके बाद पाया गया कि बच्ची टचकार्डिया, टैचिपेना और हेपेटोमेगाली के साथ पीड़ित थी और इसलिए उसे सांस लेने में मुश्किल आ रही थी। उसका लाउड पासीस्टोल भी न्यूनतम था। जन्मजात कार्डियक विफलता के उपचार के लिए तुरंत योजना बनाई गई और उपचार शुरू कर दिया गया। 2 डी इको किया गया था और उसमें एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट और वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट का भी पता चला था।

डॉ. गोयल ने बताया कि इस तरह के जन्मजात हृदय रोग प्रति हजार बच्चों पर पांच नवजात बच्चों को प्रभावित करता है। इस विकार में हृदय कक्षों के बीच असामान्य संचार होता है जिसके परिणामस्वरूप बच्चे निमोनिया और दिल के फेल होने की संभावनाओं का शिकार बन जाते हैं। इनमें से कुछ विकार समय और चिकित्सा सहायता के साथ अपने आप बंद हैं और उनमें से कुछ को बंद करने के लिए सर्जरी की आवश्यकता होती है।

इस मामले में बच्चे ने मेडिकल मैनेजमेंट (एंटीबायोटिक्स, कार्डियक सपोर्ट और वेंटिलेशन) को सही रिस्पांड किया और अगले 3-4 दिनों में उसे वेंटिलेटर से हटा दिया गया। उसको स्तनपान करवाना शुरू किया गया और उसे तय अंतराल पर बढ़ा दिया गया। निमोनिया भी ठीक होना शुरू हो गया और अगले 10 दिनों में बच्चा काफी हद तक ठीक हो गया था। हमने अपने बच्चे को पूर्ण स्तनपान करने पर बेहतर पाते हुए अस्पताल से छुट्टी दे दी और हार्ट डिफेक्ट को बंद करवाने के लिए नियमित फॉलोअप की भी सलाह दी है।

बच्ची के पिता नरेंद्र कुमार ने कहा, उन्होंने सभी उम्मीदों को खो दिया था लेकिन पारस ब्लिस में समय पर इलाज के साथ, अब वे खुश हैं कि उनकी बच्ची को बचा लिया गया है। बच्ची के पिता को सलाह दी गई है कि वे हर छह सप्ताह बाद बच्ची के हार्ट डिफेक्ट पर कड़ी नजर रखने के लिए उसे एक पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट को जरूर दिखाएं।

पारस ब्लिस हॉस्पिटल का नीकू, अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त है और ये जन्म के समय कम वजन वाले बच्चों और बेहद कम वजन वाले नवजात आदि को संभालने में सक्षम है। नीकू में सभी आधुनिक सुविधाएं हैं और ये नवजात शिशुओं का उपचार करने में सक्षम है। नीकू स्टाफ भी अच्छी तरह से प्रशिक्षित है और ये बीमार नवजात को उपचार प्रदान करने के लिए सभी आधुनिक मेडिकल उपकरणों से सुसज्जित है।

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