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ट्राइसिटी में 40% महिलाएं इर्रेग्यूलर मेंस्ट्रूयल सायकल से पीड़ित

ट्राइसिटी में 40% महिलाएं इर्रेग्यूलर मेंस्ट्रूयल सायकल से पीड़ित

  • आईटी पार्क, चंडीगढ़ में किया गया सर्वेक्षण, लगभग 500 महिलाओं को देखा गया, जिसमें 22-30 आयु समूह के रोगियों को है इर्रेग्यूलर मेंस्ट्रूयल सायकल
  • आधुनिक युग में मीनोपाज से जुड़ा तनाव, रूट्रेस हार्मोन को रिलीज कर सकता है जो एस्ट्रोजन के उत्पादन को बाधित कर सकते हैं और मिस पीरियड का कारण बन सकता है
  • अनियमित माहवारी चक्र वाली महिलाएं डिम्बग्रंथि (ओवेरियन) के कैंसर, तनाव, चिंता (एन्जाइटी) के मुद्दों के जोखिम को दोगुना कर सकती हैं।
  • पारस ब्लिस अस्पताल में डॉक्टर कहते हैं, अस्वस्थ जीवनशैली, जंक फूड और अल्कोहल का सेवन अनियमित महावारी का कारण हो सकता है

पंचकुला 9 जनवरी 2018: जब अनहेल्दी मेंस्ट्रूयल सायकल की बात आती है तो भारत शीर्ष देशों में स्थान रखता है। इर्रेग्यूलर पीरियड प्रमुख स्वास्थ्य चिंता (मेजर हेल्थ कंसर्न) का विषय है और यदि इसक इलाज नहीं किया जाता है तो अन्य स्वास्थ्य समस्सयाएं जैसे इंन्फर्टिलिटी, पीसीओएस, एनीमिया, वजन घटना, भावनात्मक असंतुलन (इमोशनल इंबेलेंस) और आदि हो सकती हैं। 68% से अधिक महिलाओं में ऐंठन (क्रैंप), थकावट और सूजन जैसे गंभीर पीरियड से संबंधित लक्षण दिखाई देते हैं। विभिन्न लक्षणों में, 47% से अधिक में ऐंठन(क्रैंप), नोटिस किया गया है। लगभग 49% महिलाओं में थकावट और 28% महिलाओं ने अपने सायकल के दौरान ब्लॉटिंग महसूस करने की शिकायत की है। लगभग सभी ने अपने पूरे सायकल में किसी न किसी बिंदु पर मूड स्विंग होने की बात भी कही है।

आईटी पार्क, चंडीगढ़ में किए गए सर्वेक्षण के अनुसार, लगभग 500 महिलाओं को देखा गया जिनमें ज्यादातर महिलाओं में सबसे आम स्वास्थ्य समस्या इर्रेग्यूलर पीरियड की थी। अधिकांश रोगी 22-30 आयु वर्ग की थी ओर 40% महिलाएओं को इर्रेग्यूलर पीरियड होते हैं।

सीनियर कंसल्टेंट ऑब्स्टेट्रिक्स और गायनोकोलोजी पारस ब्लिस पंचकुला, डॉ शिल्वा के अनुसार “अनियमित माहवारी (इर्रेग्यूलर पीरियड) का मतलब है कि आपके परियड के दिनों की संख्या में भिन्नता है या पीरियड कुछ देर से या कुछ महीनों तक रुक सकता है। पीरियड में देरी का मतलब यह नहीं है कि कुछ गंभीर हो रहा है, लेकिन यह तनावपूर्ण हो सकता है। पीरियड आमतौर पर प्यूबर्टी के दौरान शुरू होता है, 10 से 16 वर्ष की उम्र के बीच, और वे रजोनिवृत्ति तक जारी रहता हैं, जब एक महिला 45-55 वर्षीय होती है। एक महिला के मासिक धर्म चक्र की सामान्य लंबाई 28 दिन है, लेकिन यह अगल-अलग व्यक्तियों के बीच भिन्न होती है। अनियमित मासिक धर्म तब होता है जब चक्र की लंबाई 35 दिनों से अधिक होती है, या यदि अवधि भिन्न होती है। “

पीसीओएस प्रजनन (रिप्रोडक्टिव) की उम्र की 10 महिलाओं में से एक को प्रभावित करता है, जिससे अपने प्रजनन के वर्षों के दौरान महिलाएं अधिक सामान्य हार्मोन संबंधी असामान्यताओं में से एक का अनुभव करती हैं। महिलाएं अक्सर नोटिस करती हैं कि जब अनियमित खून बहता है या तो बहुत कम या बहतु अधिक बार और ज्यादा और अक्सर हेयर ग्रोथ भी तेज होती है, तब कुछ गलत हो रहा है।

कारणों और अन्य स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों पर बात करते हुए डॉ शिल्वा कहती हैं, ‘कई महिलाओं के लिए, अनियमित या इन्फ्रिक्येंट मासिक धर्म कोई बुरी चीज नहीं होती है। लेकिन एक ऐसी स्थिति जिससे अनियमित अवधि हो सकती है पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम, या पीसीओएस  से महिलाओं को कई स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं हो सकती हैं, जिनमें एक्सेस हेयर ग्रोथ से लेकर फर्टिलिटी इश्यू तक और हृदय रोग और मधुमेह (डायबिटीज) के खतरे में वृद्धि हो सकती है। अनियमित महावारी का सबसे सामान्य कारण क्रोनिक मेडिसिन, तनाव और चिंता, प्यूबर्टी, रजोनिवृत्ति (मीनोपोज) या हार्मोनल गोलियां हो सकती हैं। आधुनिक युग में रजोनिवृत्ति (मीनोपाज) से जुड़ा तनाव, रूट्रेस हार्मोन को रिलीज कर सकता है जो एस्ट्रोजन के उत्पादन को बाधित कर सकते हैं और मिस पीरियड का कारण बन सकता है।

कई पीसीओएस रोगियों में प्रजनन समस्याओं का अनुभव होता है, क्योंकि वे हर महीने निषेचन के लिए अंडे का उत्पादन नहीं कर सकते हैं। मधुमेह का खतरा बढ़ता है, इसमें 30 प्रतिशत पीसीओएस मरीज़ प्री-डायबिटीज या इंसुलिन से परेशान होते हैं और 10 प्रतिशत को टाइप II डायबिटीज होती है। और पीसीओएस रोगियों को एंडोमेट्रियल कैंसर यानि गर्भाशय की परत का कैंस बढ़ने का जोखिम हो सकता है।

एक अनियमित महावारी भी गर्भ धारण करने को और अधिक कठिन बना सकती है, खासकर यदि आप हर महीने ओव्यूलेट या अंडा नहीं बनाती हैं हैं। अनियमित महावारी वाली महिलाओं में जो बच्चे करने की कोशिश कर रही हैं, कभी-कभी ओवुलेशन बढ़ाने के लिए प्रजनन दवाओं का निर्धारण किया जाता है।

निवारक उपायों और उपचार के बारे में बात करते हुए डॉ शिल्वा कहती हैं, “अनियमित महावारी जो प्यूबर्टी के दौरान होती हैं या महिलाएं रजोनिवृत्ति तक पहुंचती हैं, आमतौर पर उन्हें उपचार की आवश्यकता नहीं होती है। यदि अनियमित रक्तस्राव गर्भनिरोधक के कारण होता है, और यह कई महीनों तक जारी रहता है, तो महिला को डॉक्टर से कंसल्ट करना चाहिए। पीसीओएस, अधिक वजन, या ओबेसिटी, वजन कम होने के मामलों में मासिक धर्म चक्र को स्थिर करने में मदद मिल सकती है। ध्यान योग और स्वस्थ जीवन शैली अनियमित चक्र को मेन्टेन रख सकते हैं। मानसिक तनाव अगर भावनात्मक तनाव, इटिंग डिस्टॉर्डर, या अचानक वजन घटने से अनियमित पीरियड शुरू हो सकता है। “

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