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स्कूल स्टूडेंट्स में सैनिटरी नैपकिन को वितरित किया गया पारस ब्लिस हॉस्पिटल, रोटरी क्लब पंचकूला ने किशोरावस्था लड़कियों के लिए हेल्थ टॉक (स्वास्थ्य वार्ता) आयोजित की

स्कूल स्टूडेंट्स में सैनिटरी नैपकिन को वितरित किया गया पारस ब्लिस हॉस्पिटल, रोटरी क्लब पंचकूला ने किशोरावस्था लड़कियों के लिए हेल्थ टॉक (स्वास्थ्य वार्ता) आयोजित की

पंचकूला, 25 अगस्त, 2018: पारस ब्लिस हॉस्पिटल ने रोटरी क्लब पंचकूला के सहयोग से आज यहां सार्थक गवर्नमेंट इंटीग्रेटेड मॉडल सीनियर सैकेंडरी स्कूल, सेक्टर 12-ए में फीमेल एडोलसेंट हेल्थ एंड हाइजीन पर एक हेल्थ टॉक का आयोजन किया। हेल्थ टॉक के साथ ही क्लास 6 से 12 तक की स्टूडेंट्स को 600 से अधिक फ्री सैनिटरीनैपकिन भी वितरित किए गए।

डॉ. मोनिका अग्रवाल, सीनियर कंसल्टेंट ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनकोलॉजी, पारस ब्लिस हॉस्पिटल, ने 300 गल्र्स स्टूडेंट्स, टीचर्स के अलावा 50 से अधिक रोटेरियनों और उनके जीवनसाथियों को एक इंटरएक्टिव टॉक प्रदान की और विभिन्न स्वास्थ्य विषयों पर बातचीत की। इस मौके पर रोटरी क्लब पंचकूला के प्रेसिडेंट श्री राम पंसारी भी अन्यरोटारियंस के बीच मौजूद थे। उन्होंने किशोर लड़कियों को उनके स्वास्थ्य और स्वच्छता के बारे में जागरूक करने के लिए अस्पताल के अधिकारियों का धन्यवाद किया।

डॉ. मोनिका अग्रवाल, सीनियर कंसल्टेंट ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनकोलॉजी, पारस ब्लिस हॉस्पिटल, ने कहा कि ‘‘किशोरावस्था जीवन में एक विशेष अवधि है जब बचपन से वयस्कता में क्रमिक प्रवेश होता है जो बच्चे में कई शारीरिक, मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक परिवर्तन लाता है। इससे इन्हें काफी सारे भ्रम भी पैदा होता है और इसे एकउज्ज्वल और स्वस्थ भविष्य के लिए मार्ग प्रशस्त करने के लिए संवेदनशील तरीके से संभाला जाना चाहिए।’’

डॉ.मोनिका ने कहा कि कद और वजन बढऩे के अलावा लड़कियों में मासिक धर्म काल की शुरुआत भी होती है। मासिक धर्म को लेकर हमारे देश में बहुत सारे टैबू (सामाजिक धब्बे) जुड़े हुई है जिसे हम आज अस्वीकार करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि ‘‘हम जागरूकता फैलाना चाहते हैं कि यह लड़कियों में एक पूरी तरह से सामान्य, स्वस्थऔर जैविक कार्य है जो उन्हें किसी भी गतिविधि से नहीं रोकना चाहिए। मासिक धर्म स्वच्छता, किशोर स्वास्थ्य, आहार और आयरन की खुराक का महत्व, आदि वह संदेश है जिसे हम व्यक्त करना चाहते हैं। यदि वे पर्याप्त स्वच्छता प्रक्रियाओं का पालन करते हैं, उचित उत्पादों का उपयोग करते हैं, अच्छी तरह से खाते हैं और हाइड्रेटेड रहते हैंतो महीने के इस समय में पेश आने वाली मुश्किलों से आसानी से उबरा जा सकता है।’’

डॉ. अग्रवाल ने ने इस स्तर पर जोर दिया कि बच्चों को यौन शिक्षा, प्रजनन प्रक्रियाओं और गर्भनिरोधक के बारे में अच्छी तरह से अवगत होना चाहिए। सहकर्मी समूह, इंटरनेट या जानकारी के किसी भी अविश्वसनीय स्रोत के बजाय इस चरण में बच्चों की जिज्ञासा को पूरा करने के लिए माता-पिता, शिक्षकों और डॉक्टरों की जिम्मेदारी होना चाहिए।डॉ. मोनिका ने कहा कि हम उन्हें अपने शरीर में हर नए विकास के बारे में सिखाने में सक्षम होने चाहिए ताकि जब वे वयस्कता में प्रवेश करें, वे हर संभावित जानकारी से लैस हों जो उन्हें स्वस्थ, सुरक्षित और समाज में विभिन्न प्रकारों के विकारों से मुक्त रखती है।

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