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दीवाली के बाद पंचकुला हॉस्पिटल में आने वाले रेस्पीरेटरी रोगियों में लगभग 25% बढ़ोत्तरी हुई है

दीवाली के बाद पंचकुला हॉस्पिटल में आने वाले रेस्पीरेटरी रोगियों में लगभग 25% बढ़ोत्तरी हुई है

  • पिछले साल की तुलना में प्रदूषण कम होने के बावजूद पंचकूला और चंडीगढ़ क्षेत्र में वायु की गुणवत्ता असुरक्षित
  • प्रदूषण स्तर में गिरावट के बावजूदए रेस्पीरेटरी रोगियों में करीब 25ः वृद्धि दर्ज की गईए बच्चे हुए सबसे अधिक प्रभावित
  • चिकित्सकों ने इस दीवाली आपके बच्चे को श्वसन रोगों से बचाने के लिए उपयुक्त सलाह दी है।

पंचकुला, 24 अक्टूबर 2017 | 2016 के मुकाबले चंडीगढ़ और पंचकुला क्षेत्र में इस साल दिवाली के बाद प्रदूषण के स्तर में गिरावट देखी गई, लेकिन हवा की गुणवत्ता अब भी असुरक्षित है। 2016 के उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि दीवाली रात में क्षेत्र में रेस्पीरेबल सस्पेंडेंड पार्टिकुलेट मैटर (आरएसपीएम) का स्तर औसत रूप से 100 एमसीजी एम3 की राष्ट्रीय अनुमत सीमा के मुकाबले लगभग 300 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर (एमसीजी एम3) दर्ज किया गया था। हालांकि, इस वर्ष दीवाली रात में वायु की गुणवत्ता पंचकूला में 133 से 214 एमसीजी एम3 और चंडीगढ़ में 172 के बीच दर्ज की गयी।

हालांकि, वायु की गुणवत्ता अभी भी असुरक्षित है क्योंकि प्रदूषण का स्तर 100 एमसीजी एम3 की सीमा से अधिक है।

हमने दिवाली के बाद हमारे अस्पताल में आने वाले रेस्पीरेटरी रोगियों में 25ः वृद्धि नोटिस की है। यह अच्छी तरह से ज्ञात है कि आतिशबाजी दौरान गैसों का एक विषाक्त मिश्रण जारी होता है जिसमें कार्बन मोनोऑक्साइडए कार्बन डाइऑक्साइडए सल्फर डाइऑक्साइडए और वातावरण में मैंगनीज और कैडमियम कण भी शामिल होते हैं। दीवाली के दौरान वातावरण में उत्सर्जन रहता है और भले ही ऐसा लगता हो कि मौसम साफ हो गया है लेकिन इसे नष्ट होने में 4 महीने लगते हैं। सीनियर कंस्ल्टेंट पीडियाट्रिक डॉ ज्योति चावला ने कहा कि इसलिएए सावधानी बरतना अब और अधिक महत्वपूर्ण है।

दीवाली के आसपास हर साल, अस्पतालों में अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, और क्रोनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पुल्मोनरी डिसीज (पुरानी प्रतिरोधी फुफ्फुसीय रोगों) से पीड़ित लोगों की संख्या में वृद्धि होती है।

डॉ ज्योति कहती हैं कि बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं, और आमतौर पर दिवाली के बाद हम बच्चों में सांस की बीमारी में 40 वृद्धि की नोटिस करते हैं।

दिवाली के आसपास सांस की बीमारियों के प्रति बच्चों के अधिक संवेदनात्मक होने के कारणों को समझाते हुए, सीनियर कंसल्टेंट पीडियाट्रिक, पारस ब्लिस हॉस्पिटल के डॉ ज्योति चावला कहती हैं, पटाखों से निकलने वाली गैस के संपर्क में लंबे समय तक रहने से, विशेष रूप से वयस्कों की तुलना में बच्चे अधिक प्रभावित होते हैं। वयस्कों में बच्चों की तुलना में कण पदार्थ और वायु प्रदूषण के खिलाफ बेहतर सुरक्षित होते हैं। बच्चे वयस्कों की तुलना में ज्यादा सक्रिय हैं और इसलिए उनके फेफड़ों में हवा का आवागमन अधिक होता है, क्योंकि उनके किशोरों होने तक फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं होते हैं। पर्यावरणीय एजेंटों और प्रदूषण को बाहर निकालने या डिटोक्सीफाइ करने की बच्चों की क्षमता में अंतर होता है। इसके अलावा, बच्चों में एयरवे एपिथेलियम, जो श्वसन वायरस और प्रदूषण के खिलाफ पहली पंक्ति की रक्षा है, वयस्कों की तुलना में अधिक पारगम्य है, जो उन्हें रोगों के प्रति अधिक संवेदनशील बनाती हैं।

दिवाली के दौरान वायु प्रदूषण में वृद्धि मानव अपव्यता या फिजूलखर्ची की वजह से होती है, और इसलिए लोगों को अपने स्वास्थ्य की परवाह करनी चाहिए और दिवाली समारोह के बाद अपने आप को और अपने आसपास के बच्चों को विषाक्त हवा से बचाने के लिए निरोधक उपायों का पालन करना चाहिए। निम्न उपाय बच्चों और वयस्कों में सांस की बीमारियों को समान रूप से रोकने में मदद कर सकते हैं।

  • वयस्कों को दिवाली के एक सप्ताह बाद शहर के दैनिक हवा के गुणवत्ता सूचकांक को नोट करना चाहिए और अगर प्रदूषण का स्तर 200 एमसीजी एम 3 से अधिक हो, तो बच्चों को बाहर नहीं भेजा जाना चाहिए।
  • बच्चों को खेलने के लिए और अन्य गतिविधियों के लिए बाहर जाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। दिवाली के बाद कम से कम एक सप्ताह तक अपने बच्चों को गुणवत्ता वाले एयर मास्क पहनाकर ही बाहर जाने की अनुमति दें।
  • यह भी महत्वपूर्ण है कि इनडोर वायु स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त हो। बालकनियों या पोर्च में पटाखे नहीं चलाने चाहिए। विषाक्त गैसों को अंद आने से रोकने के लिए दीवाली की रात को खिड़कियां और दरवाजे बंद रखें।
  • इस अवधि के दौरान बच्चों को अधिक पानी पीने के लिए प्रोत्साहित करें। जल, प्रणाली में से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है।
  • एंटी ऑक्सीडेंट्स के समृद्ध आहार का सेवन बढ़ाएं जिसमें फल और सब्जियां शामिल हों। वे शरीर में विटामिन और इसकी प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाने में मदद करते हैं।
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