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समय पर टीकाकरण हेपेटाइटिस को रोक सकता है: डॉ. आशीष अरोड़ा

समय पर टीकाकरण हेपेटाइटिस को रोक सकता है: डॉ. आशीष अरोड़ा

पंचकूला, 28 जुलाई, 2018: विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर डॉ. आशीष अरोड़ा, कंसल्टेंट, इंटर्नल मेडिसन, पारस ब्लिस हॉस्पिटल ने आज विभिन्न प्रकार के हेपेटाइटिस और इसकी रोकथाम की जानकारी दी और एक एडवाइजरी भी दी।

उन्होंने कहा कि हेपेटाइटिस लिवर की सूजन है और वायरल हेपेटाइटिस इसका प्रमुख कारण है। ये हेपेटाइटिस का प्रमुख कारण है। लगभग सभी मामलों में 5 वायरल एजेंटों में से एक – हेपेटाइटिस ए वायरस (एचएवी), हेपेटाइटिस बी वायरस (एचबीवी), हेपेटाइटिस सी वायरस (एचसीवी), हेपेटाइटिस डी वायरस (एचडीवी) और हेपेटाइटिस ई वायरस (एचईवी) होता है। सभी प्रकार के वायरस एसिम्प्टोमैटिक से फुलमिनेंट इंफेक्शन से लेकर क्लीनिकली रूप से इसी तरह की बीमारी का कारण बनते हैं। एचबीवी, एचसीवी और एचडीवी क्रोनिक संक्रमण का कारण बन सकते हैं जिससे सिरोसिस और हेपेटोकेल्युलर कार्सिनोमा (एचसीसी) होता है।

हेपेटाइटिस ए के मामले में, ट्रांसमिशन का तरीका फेयको-ओरल मार्ग है। अतिसंवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोग, एचएवी महामारी वाले इलाकों में यात्रा करने से, नशीली दवाओं का उपयोग करने वाले, समलैंगिक पुरुषों में इस रोग के बढ़ने का अधिक जोखिम होता है। डॉ अरोड़ा ने कहा कि इसे उचित स्वच्छता और वैक्सीनेशन के साथ रोका जा सकता है। आईजी के साथ पैसिव इम्यूनाइजेशन और एक्टिव इम्यूनाइजेशन के साथ वैक्सीन उपलब्ध हैं। आईजी को अनवैक्सीनेटड लोगों को दिया जा सकता है जो कि एचएवी के संपर्क में आ सकते हैं।

हेपेटाइटिस बी के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए डॉक्टर ने कहा कि एचबीवी रोगियों, गर्भवती महिलाओं, एचबीएसएजी पॉजिटिव माताओं से पैदा होने वाले बच्चों, ड्रग यूजर्स, कई लोगों से यौन संबंधों वाले लोगों में इस रोग के विकसित होने का उच्च जोखिम है। एक्टिव इम्यूनाइजेशन के तौर पर वैक्सीन को नवजात और अनवैक्सीनेटेड अधिक जोखिम वाले लोगों को दिया जाना चाहिए। इस वैक्सीन की 3 खुराक दी जाती है। उन्होंने सुझाव दिया कि एचबीवी के संपर्क में आने वाले अनवैक्सीनेटेड व्यक्ति के लिए एचबीआईजी के साथ-साथ वैक्सीन की भी पेशकश की जानी चाहिए।

हेपेटाइटिस डी केवल उन लोगों में होता है जो पहले ही एचबीवी से संक्रमित हैं। इसलिए, रोकथाम एचबीवी संक्रमण को रोकने के लिए है, जबकि हेपेटाइटिस सी मुख्य रूप से परक्यूटान्यूस रूट से ट्रांसमिट होता है। क्रोनिक वायरल हेपेटाइटिस भी इस रोग का प्रमुख कारण है। रोकथाम के लिए कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है।

डॉ. अरोड़ा ने बताया कि हेपेटाइटिस ई फेयको-ओरल मार्ग से फैलता है। उचित स्वच्छता बनाए रखकर इसे रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि ऑटोइम्यून हेपेटाइटिस इम्यून सिस्टम विकार के कारण ही होता है, क्योंकि इसके परिणामस्वरूप शरीर पर इसके अपनी कोशिकाओं द्वारा ही हमला किया जाता है। इसके लक्षण वायरल हेपेटाइटिस के समान हैं। इसका उपचार स्टेरॉयड और इम्यूनोस्पे्रसंट दवाएं हैं।

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