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Apr 25, 2022

गुड़गांव में रहने वाले 2 साल से कम उम्र के 5.8% बच्चोँ को मिलता है उपयुक्त आहार; हरयाणा में 12वेँ रैंक पर - पारस हॉस्पिटल गुडगाँव

गुड़गांव में रहने वाले 2 साल से कम उम्र के 5.8% बच्चोँ को मिलता है उपयुक्त आहार; हरयाणा में 12वेँ रैंक पर - पारस हॉस्पिटल गुडगाँव

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 4 ;एनएफएचएसद्ध के अनुसार शहरी इलाकोँ में रहने वाले 6 माह से 23 माह के बीच के 5ण्6 पर्सेंट बच्चोँ को और ग्रामीण इलाकोँ में रहने वाले इस आयुवर्ग के 6ण्3 पर्सेंट बच्चोँ को ही उपयुक्त आहार मिलता है।

आंकडोँ के अनुसारए हरयाणा में रहने वाले 6 माह से 23 माह आयुवर्ग के सिर्फ 7ण्5ः बच्चोँ को ही उपयुक्त आहार मिल पाता है।

एनएफएचएस 4 के आंकडे बताते हैं कि पूरे भारत में 6 माह से 23 माह आयुवर्ग के सिर्फ 9ण्6ः बच्चोँ को ही उपयुक्त आहार मिलता है।

नवजात बच्चोँ को उपयुक्त आहार न मिलने से वे भूखे रहते हैं और खाद्य असुरक्षा उन्हेँ कुपोषण की ओर ले जाती हैए जिसका असर उनके शारीरिक और संज्ञानात्मक विकास को प्रभावित करता है।

गुड़गांवए 17जी ।नहनेज 2018रू गुड़गांव में रहने वाले 6 माह से 23 माह आयुवर्ग के करीब 6ः बच्चोँ को ही उपयुक्त आहार नसीब होता हैए यह आंकडा राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे 4 ;एनएफएचएसद्ध से सामने आया है। शहरी इलाकोँ में रहने वाले 6 माह से 23 माह के बीच के 5ण्6 पर्सेंट बच्चोँ को और ग्रामीण इलाकोँ में रहने वाले इस आयुवर्ग के 6ण्3 पर्सेंट बच्चोँ को ही उपयुक्त आहार मिलता है।हरयाणा मेंए 7ण्5ः ब्रेस्टफीडिंग वाले बच्चोँ को 6 माह से 23 माह की आयु के बीच उपयुक्त आहार पाते हैं।

पारसहॉस्पिटलएगुड़गांवके डॉ मनीष माननए एचओडीए पेडियाट्रिक्स कहते हैंए श्नवजात बच्चोँ को भरपूर भोजन न मिलने से वे भूखे रहते हैं और उनके शरीर को भरपूर पोषण नहीं मिल पाता है। एक बच्चे के आहार का असर न सिर्फ कम समय के लिए बल्कि लम्बे समय के लिए उनके शरीर और दिमाग की सेहत पर पडता है। इस अनउपयुक्तता का एक सबसे चर्चित परिणाम है बच्चोँ में कुपोषण्। नवजात बच्चोँ को उपयुक्त आहार न मिलने से वे भूखे रहते हैं और खाद्य असुरक्षा उन्हेँ कुपोषण की ओर ले जाती हैए जिसका असर उनके शारीरिक और संज्ञानात्मक विकास को भी आगे चलकर प्रभावित करता हैरू फलए सब्जियाँ न मिलना और खाने में ऐसी चीजेँ मिलना जो निम्न स्तर की होती हैंए से बच्चोँ में तमाम तरह के पोषक तत्वोँ जैसे कि विटामिन एए बी6ए बी12ए सीए आयरनए ज़िंकए फोलेटऔर कैल्शियम आदि की कमी हो जाती हैए जिनका सम्बंध बडे स्तर पर अनुपस्थितीए शिथिलता और निम्न ग्रेड से होता है।

एनएफएचएस 4 के उन आंकडोँ के अनुसार जो माँ के साथ रहने वाले सबसे छोटे बच्चोँ पर आधारित हैं के अनुसारए इस मामले में पूरे हरयाणा के 22 जिलोँ में गुडगांव की रैंक 12वीँ है। इस संख्या में उन लोगोँ को शामिल किया गया है जिन्हेँ 4 अथवा इससे अधिक समूह का भोजन मिलता है और स्तनपान कर रहे बच्चोँ में न्यूनतम मील फ्रिक्वेंसी हैए जबकि ऐसे बच्चे जिन्हेँ स्तनपान का अवसर नहीं मिलता है और उन्हेँ कम से 3 या इससे अधिक बार भोजन मिलता है ;अन्य दूध अथवा दूध से बने उत्पाद कम से कम दिन में दो बारए सेमी.सॉलिड अथवा सॉलिड.फूड दिन मे कम से कम दो बारए 6 से 8 माह केउन बच्चोँ के मामले में जिन्हेँ माँ का दूध भी मिलता है और 9 से 23 माह के वे बच्चे जो स्तनपान भी करते हैं उन्हेँ दिन में कम से कम 3 बार दूध या इससे बने अन्य उत्पादऔर कम से कम 4 बार सेमी सॉलिड अथवा सॉलिड फूडए जिसमेँ दूध अथवा इससे बने अन्य उत्पाद शामिल नहीं होँद्ध दिया जाना चाहिए।

युनिसेफ के अनुसारए विकासशील दुनिया के गम्भीर कुपोषण का शिकार 90ः बच्चे एशिया और अफ्रीका में रहते हैं। युनिसेफ के अनुसारएभारत में दुनिता के एक तिहाई ऐसे बच्चे रहते हैं जो कुपोषित हैं और परिणामस्वरूप दुनिया भर के हर 10 अविकसित बच्चोँ में 3 यहाँ हैं। जीवन के पहले दो वर्षोँ में बच्चे को मिलने वाला पोषण यह सुनिश्चित करता है कि वे कितना बेहतर ढंग से सर्वाइव करेंगे और आगे के जीवन में उनकी सेहत कैसी रहेगी और उन्हेँ भरपूर विकास का अवसर मिलेगा या नहीँ।

पारस हॉस्पिटल गुडगांव उन बेहतरीन अस्पतालोँ में शामिल है जो भारत में न्युरोसाइंसेजए कार्डियोलॉजीए ऑर्थोपेडिकए नेफ्रोलॉजीए गैस्ट्रोइंटेरोलॉजी और गैस्ट्रोइंटेरोलॉजी के क्षेत्र में बेहतरीन इलाज और देखभाल उपलब्ध करा रहे हैं।


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