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Apr 25, 2022

6 माह से कम उम्र के बच्चोँ के स्तनपान के मामले में हरयाणा में पिछले एक दशक में दर्ज हुआ तीन गुना सुधार

6 माह से कम उम्र के बच्चोँ के स्तनपान के मामले में हरयाणा में पिछले एक दशक में दर्ज हुआ तीन गुना सुधार
  • राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे 4 ;एनएफएचएसद्ध के अनुसार हरयाणा में रहने वाले 6 माह से कम उम्र के 50ण्3ः बच्चोँ को मिलता है एक्सक्लूसिव स्तनपान का अवसर
  • एनएफएचएस 3 के आंकडोँ के अनुसार राज्य में 6 माह से अम उम्र के सिर्फ 16ण्9ः बच्चोँ को ही मिल रहा था एक्सक्लूसिव स्तनपान का मौका
  • भारत में 6 माह से कम उम्र के करीब 50ः बच्चे एक्सक्लूसिव तौर पर स्तनपान करते हैंए 2005.2006 में हुए सर्वे में यह संख्या 46ण्4ः थी
  • भारत ने 90ः बच्चोँ को जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान करने का अवसर उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया है

 

गुडगांवए 1 अगस्त 2018रूनेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे ;एनएफएचएसद्ध 4 के अनुसार हरयाणा में 6 माह से कम उम्र के बच्चोँ को एक्सक्लूसिव रूप से स्तनपान उपलब्ध कराए जाने के मामले में तीन गुना तक सुधार दर्ज किया गया है। एनएफएचएस 3 के दौरान राज्य के सिर्फ 16ण्9ः बच्चोँ को ही एक्सक्लूसिव स्तनपान का अवसर मिल पाता था।

पारस हॉस्पिटल गुडगांव की सीनियर कंसल्टेंट एंड यूनिट हेड ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकॉलजीए डॉण् नूपुर गुप्ता कहती हैंए श्विश्व स्वास्थ्य संगठन ;डब्ल्युएचओद्ध ने एक बार फिर 6 माह से कम उम्र के बच्चोँ के जीवन में एक्सक्लूसिव स्तनपान के महत्व पर प्रकाश डाला है। माँ का दूध बच्चे के विकास के लिए आदर्श भोजन होता है। इसमेँ पाए जाने वाले अतिआवश्यक पोषक तत्व बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढाते हैं और उनके सेंसरी एवम संज्ञानात्मक विकास में सहायक होते हैं। माँ का दूध विटामिन एए बी1ए बी2ए बी6ए बी12ए सीए डी और ई का भी प्रमुख स्रोत होता है।एश्

स्तनपान से बाल मृत्युदरए कुपोषण और डायरियाएवम एनीमिया जैसी बीमारियोँ की चपे में आने का खतरा कम होता है। यह बच्चोँ को कान के संक्रमणए न्युमोनियाए लिम्फोमाए ल्युकीमियाए क्रॉन्स डिजीजए अस्थमाए एक्जिमाए डायबीटीज और सडेन इनफैंट डेथ सिंड्रोम ;एसआईडीएसद्ध के खतरे से लडने हेतु तैयार करता है।

देशभर में 6 माह से कम उम्र के आधे से थोडे अधिक बच्चोँ को एक्सक्लूसिव स्तनपान का  अवसर मिलता हैए एनएफएचएस 4 के आंकडोँ के अनुसार इस आयुवर्ग के 55ः बच्चोँ को स्तनपान नसीब होता है।भारत मेंए करीब एक लाख बच्चे डायरिया और न्युमोनिया जैसी बीमारियोँ से मर जाते हैंए जबकि उपयुक्त स्तनपान के जरिए इन बीमारियोँ की रोकथाम सम्भव है। चाइनाए इंडोनेशियाए मेक्सिको और नाइजीरिया के साथ.साथ भारत में अपर्याप्त स्तनपान के चलते हर साल 2ए36ए000 बच्चोँ की मौत हो जाती है।

पारस हॉस्पिटलए गुडगांव की सीनियर कंसल्टेंट ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकॉलजिस्ट डॉण् पूजा मेहता कहती हैंए श्हमेँ निश्चित रूप से और ऐसे कदम उठाने की जरूरत है जिनसे अधिक से अधिक बच्चोँ तक माँ का दूध पहुंच सके। डोनर मिल्क बैंक एक बहुत ही अच्छी पहल हैए जिनके जरिए उन बच्चोँ को भी माँ का दूध नसीब हो सकेगाजिन्हेँ किसी कारण से उनकी अपनी माँ का दूदध नहीं मिल पाता है। माँओँ के लिए और बेहतर सपोर्ट सिस्टम की जरूरत है जिसमेँ उन्हेँ सहयोगियोँ और विशेषज्ञ काउंसलिंग मिल सके और वे अपने बच्चोँ को ठीक सए स्तनपान करा सकेँ। इसके अलावा हमारी सार्वजनिक जगहोँ पर ऐसी सुविधा बनाने की जरूरत है ताकि यहाँ भी माँएँ आराम से बच्चे को दूध पिला सकेँ और बाहर रहते हुए भी बच्चोँ को पर्याप्त स्तनपान का अवसर मिल सके।श्

जन्म के बाद एक घंटे के भीतर स्तनपान की शुरुआत करकेए बच्चे को 2.3 साल की उम्र तक स्तनपान कराया जा सकता है। भारत ने 90ःबच्चोँ को जन्म के बाद एक घंटे के भीतर माँ का दूध उपलब्ध कराना सुनिश्चित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। साथ ही फॉर्मुला मिल्क से बच्चोँ को दूर रखने और माँओँ के बीच स्तनपान को बढावा देने के लिए कानूनी उपाय भी किए गए हैंए जैसे इनफैंट मिल्क सब्सिच्यूटए फीडिंग बॉटल एंड इनफैंट फूड्स एक्टए ;आईएमएस एक्टद्ध 2003 जो कि इनफैंट मिल्क सब्सिच्यूट के उत्पादनए सप्लाई और वितरण को नियंत्रित करता है। पिछ्ले सालए सरकार ने प्राइवेट रोजगार प्रदाताओँ के लिए वेतन सहित मातृत्व अवकास को 3 महीने से बढाकर 6 माह करना अनिवार्य कर दिया है।

पारस हॉस्पिटल गुडगांव देश के उन अग्रणी अस्पतालोँ में शामिल है जहाँ न्युरोसाइंसए कार्डियोलॉजीए ऑर्थोपेडिकए नेफ्रोलॉजीए गैस्ट्रोइंटेरोलॉजी और क्रिटिकल केयर की बेहतरीन सुविधा उपलब्च कराता है।


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