Apr 25, 2022
अपर्याप्त नींद किशोरोँ और युवाओँ में बढा देता है दिल की बीमारियोँ का खतरा रू पारस हॉस्पिटल गुडगाँव के हृदय रोग विशेषज्ञों की टिप्पणी
युवाओँ में दिल की बीमारियाँ 35 प्रतिशत तक बढ गई हैंय शहरोँ में रहने वाले किशोरोँ को ग्रामीण इलाकोँ के किशोरोँ के मुकाबले दिल की बीमारी होने का खतरा 8 गुना अधिक है
अपर्याप्त नींद से बढ जाता है सी.रिएक्टिव प्रोटीनए जो कि हार्ट अटैक के लिए एक इंफ्लेमेटरी मार्कर है
स्लीप एप्निया युवाओँ और वयस्कोँ में कंजेस्टिव हार्ट फेलियरए दिन में हर समय नींद आने जैसी समस्याओँ के लिए सबसे अधिक जिम्मेदार है
निष्क्रिय जीवनशैलेए खान.पान की अस्वस्थ्य आदतए धूम्रपान और प्रदूषण युवाओँ में दिल की समस्याओँ का खतरा बढा रहा है
गुडगांवए 12 जुलाई 2018रू किशोरोँ और युवाओँ में दिल की बीमारियाँ होने के मामले 35 प्रतिशत तक बढ गए हैंए जिसका एक महत्वपूर्ण कारण अपर्याप्त नींद भी है। यह ट्रेंड शहरी युवाओँ के मामले में अधिक चिंताजनक हैए जिन्हेँ ग्रामीण इलाकोँ में रहने वालोँ की तुलना में दिल की बीमारियाँ होने का खतरा 8 गुना अधिक होता है।
पारस हॉस्पिटल गुडगांव के यूनिट हेड व एसोसिएट डायरेक्टर.इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजीए डॉण् अमित भूषण शर्मा कहते हैंएश्रात के 10 बजे से लेकर सुबह के 4 बजे तक की नींद हमारे लिए बेहद आवश्यक होती है क्योंकि इस दौरान हमारे शरीर में दिन भर अधिकतम मात्रा में रिलीज हुए एंटीऑक्सिडेंट से हुए डैमेज की हीलिंग होती है। ये एंटीऑक्सिडेंट ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस से जन्मे फ्री रैडिकल्स को निष्प्रभावी करते हैं और खून का बहाव प्रभावित करने और रक्त नलिकाओँ में डैमेज के लिए जिम्मेदार खून के थक्के बनने से रोकते हैं।श्
डॉण् शर्मा कहते हैंएश्अपर्याप्त नींद से इंसुलिन रेजिस्टेंस बढता है और टाइप 2 डायबीटीज और दिल की बीमारियाँ होने का खतरा बढ जाता है। कम समय के लिए सोने से सी.रिएक्टिव प्रोटीन ;सीआरपीद्ध बढ जाता हैए जो कि हार्ट अटैक और हाइपरटेंशन के लिए एक इंफ्लेमेटरी मार्कर है। नींद काखराब पैटर्न रक्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा भी बढा सकता हैए हाई बॉडी मास इंडेक्स ;बीएमआईद्ध और मोटापे का कारण बनता है। एक तिहाई किशोर मरीज डायबीटीजए हाइपरटेंशन और मॉर्बिड ओबेसिटी से ग्रस्त होते हैं।श्
निष्क्रिय जीवनशैली जिसमेँ घंटोँ लगातार बैठे रहना होता हैए शारीरिक सक्रियता कम होती है और खान.पान की आदत खराब होती हैए जैसे कि जंक और फैटी फूड खाने की आदतए धूम्रपानऔर प्रदूषण आदि कुछ अन्य कारण हैं जिनके चलते किशोरोँ और युवाओँ में दिल की बीमारियाँ होने का खतरा बढ रहा है। पश्चिमी देशोँ में हार्ट अटैक की चरम आयु 50 से 60 साल हैए जबकि भारत में यह रेंज 30 से 40 वर्ष है। बचाव के लिए हर किसी को कुछ लक्षणोँ पर गौर करना चाहिए जैसे कि स्टैमिना में कमीए सांस लेने में तकलीफए छातीए बाहोँए गर्दनए कंधे और जबडोँ में उपर की ओर चढाई करते समय या सीढियाँ चढते समय भारीपन महसूस होनाआदिए क्योंकि ये लक्षण दिल की बीमारियोँ की शुरुआत के संकेत हो सकते हैं।
हालांकिए बचाव के कुछ उपायोँ को अपनाकर दिल की बीमारियोँ से बचा जा सकता है। कुछ ऐसी चीजेँ जिनमेँ बदलाव लाकर सुधार हो सकता हैए जैसे कि जीवनशैली में बदलावए स्वस्थ्य आहार लेनाजिसमेँ कार्बोहाइड्रेट्स और शुगर की मात्रा कम होए नियमित कम से कम 45 मिनट का एक्सरसाइज रिजीम जिसमेँ तेज कदमोँ से टहलनाए योगए ध्यान शामिल होए और भरपूर नींद लेना बेहद जरूरी है। वह सतर्क करते हैं किए श्अनियंत्रित और अवैज्ञानिक आहारए खासतौर से उन लोगोँ के मामले में जो जिम्नेजियम में ट्रेनिंग लेते हैंए उनमेँ भी दिल की बीमारियोँ का खतरा अधिक होता है। बहुत ज्यादा ह्वे प्रोटीन अथवा एनबोलिक स्टेरॉइड लेने से आपकी किडनी में जलन हो सकती है और दिल की समस्याएँ बढ सकती हैं।श्
जिन लोगोँ का दिल की बीमारियोँ का पारिवारिक इतिहास होए उन्हेँ ज्यादा सतर्क रहना चाहिए। जिन लोगोँ के माता.पिता में से किसी एक 60 साल की उम्र से पहले हार्ट अटैक हुआ होए उन्हेँ कम उम्र में हार्ट अटैक होने का खतरा 8 गुना अधिक रहता है। साल में एक बार एक ईकोकार्डियोग्राम और एक ट्रेडमिल टेस्ट ;टीएमटीद्ध कराकरए नियमित ब्लड टेस्ट कराकर ;फास्टिंग शुगर लेवल 100 से नीचे और लंच के बाद का 140 से नीचे रखकरद्ध और लिपिड प्रोफाइल कराते रहने से कार्डिएक अरेस्ट के खतरे पर नजर रखी जा सकती है।
पारस हॉस्पिटल गुडगांव न्युरोसाइंसए कार्डियोलॉजीए ऑर्थोपेडिक्सए नेफ्रोलॉजीए गैस्ट्रोइंटेरोलॉजी और क्रिटिकल केयर से सम्बंधित बेहतरीन चिकिस्ता और देखभाल मुहैया कराने वाले देश के अग्रणी अस्पताओँ में शामिल है।