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Press Coverage

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Apr 25, 2022

पारस ग्लोबल हाॅस्पिटल में आस्टियोपरोसिस व आस्टियो आर्थराइटिस पर जागरूकता कार्यक्रम

पारस ग्लोबल हाॅस्पिटल में आस्टियोपरोसिस व आस्टियो आर्थराइटिस पर जागरूकता कार्यक्रम
  • हाॅस्पिटल के आर्थोपेडिक सर्जन ने डाॅ. संजीत ने बचाव, लक्षण तथा इलाज पर विस्तार से प्रकाश डाला
  • विश्व में 50 वर्ष से अधिक उम्र की तीन में से एक महिला आॅस्टियोपरोसिस से पीड़ित है, 80 फीसदी महिलाओं में होती है यह बीमारी

दरभंगा, 6 जून: पारस ग्लोबल हाॅस्पिटल, दरभंगा में आस्टियोपरोसिस और आस्टियो आर्थराइटिस के प्रति जागरूकता जगाने के लिए एक हेल्थ टाॅक का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों लोगों ने भाग लिया। हेल्थ टाॅक में हाॅस्पिटल के आर्थोसर्जन डाॅ. संजीत ने कहा कि अच्छी जीवन शैली, व्यायाम और स्वस्थ खान-पान के जरिये इन बीमारियों से बचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि आस्टियोपरोसिस सबसे ज्यादा महिलाओं में पायी जाती है। विश्व भर में 50 वर्ष से अधिक की उम्र की तीन में से एक महिला इस बीमारी से ग्रसित होती है। 80 फीसदी महिलाओं में यह बीमारी होती है। यह बीमारी अब तक 2.5 करोड़ लोगों को हो चुकी है तथा कुछ वर्षों में इसके मरीज 3.6 करोड़ से ज्यादा हो जायेंगे। आस्टियोपरोसिस के कारण प्रतिवर्ष 15 लाख फ्रैक्चर होते हैं। महिलाओं में मासिक धर्म बंद होने के बाद हड्डी का घनत्व 1 से 2 फीसदी तक घट जाता है।

आस्टियोपरोसिस के लक्षण: पीठ दर्द, कलाई का दर्द, घुटने का दर्द, सुस्ती, फ्रैक्चर, आगे की ओर झुकना तथा सीधा चलने में असमर्थतता।

इसके कारण: आनुवांशिक, खाने में कैल्शियम और प्रोटीन की मात्रा की कमी, थायरायड की गड़बड़ी, कोल्ड ड्रिंक्स, बदलती जीवन शैली, सिगरेट और शराब का सेवन, दुबला और पतला शरीर, 50 से अधिक वर्षों की उम्र, स्टेरायड और हार्मोन जैसी दवाएं लेना, समय से पहले मासिक धर्म का बंद होना तथा हिस्टरेक्टाॅमी।

आस्टियो आर्थराइटिस के लक्षण: दर्द, कठोरता, सूजन, विकृति, कम चल पाना।

रोकथाम: भोजन में कैल्शियम, विटामिन और प्रोटीन लेना चाहिए। दूध, दही, पनीर, अंडा, कम से कम 20 मिनट का व्यायाम। निम्नलिखित चीजें खाने चाहिए। प्रुन्स, सेब, नारियल का तेल, अन्नानास, तिल के बीज, धनिया के बीज और चाय और काफी की खपत।

आस्टियोआर्थराइटिस का इलाज: फिजिकल थेरेपी, लोड रिडक्शन, दर्द निवारक दवाएं, कार्टिलेज की सुरक्षा के लिए दवा, करेक्टिव आस्टियोटाॅमी, ज्वाइंट रिप्लेसमेंट, आर्थोडेसिस आदि-आदि।


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