Apr 25, 2022
पारस HMRI ने हासिल की एक और उपलब्धि, डॉ. वारसी ने सर्जरी कर जोड़ी युवक की कटी हुई हथेली
- हास्पिटल के प्लास्टिक तथा कास्मेटिक सर्जरी विषेषज्ञ डा. शब्बीर अहमद वारसी ने दस घंटे लगातार आपरेषन कर जोड़ी अंगुलियां
- पटना सिटी के 20 वर्ष के एक युवक के दाहिने हाथ की सभी अंगुलियां सहित आधी हथेली मषीन में कटकर अलग हो गई थी।
- यह आपरेशन उसी अस्पताल में संभव है जहां माइक्रो सर्जरी के लिए मषीनें, उपकरण, सुविधाएं तथा विषेषज्ञ डाक्टर मौजूद हों, पारस में उपलब्ध हैं सभी सुविधाएं
PATNA: पारस एचएमआरआई सुपर स्पेशिलिटी हास्पिटल, राजा बाजार, पटना में पटना सिटी के 20 वर्ष के एक युवक के पूरी तरह से कटे हाथ को फिर से जोड़कर उसे राहत दिलाई गई। बिहार में संभवतः पहली बार इस तरह की सर्जरी की गयी है जिसमें दाहिने हाथ की सभी अंगुलियां सहित आधी हथेली मशीन से कट कर अलग हो गयी थी। हास्पिटल के प्लास्टिक सर्जरी तथा कास्मेटिक सर्जरी के विशेषज्ञ डा. शब्बीर अहमद वारसी ने दस घंटे तक लगातार आपरेशन कर कटे हाथेली को जोड़ा। इस आपरेशन में उनके सहयोगी डा. प्रकाश कुमार तथा एनेस्थेसिया विशेषज्ञ डा. श्री नारायण, नर्सिंग स्टाफ राबीन, सिस्टर मनु एवं सिस्टर बिमला का योगदान भी महत्वपूर्ण रहा।
डाक्टर वारसी ने कहा कि इस तरह की सर्जरी वैसे ही अस्पताल में की जा सकती है जहां इसके लिए सभी आवश्यक मशीनें, उपकरण, सुविधाएं तथा विशेषज्ञ डाक्टर मौजूद हों। चूंकि पारस एचएमआरआई हास्पिटल में ये सारी सुविधाएं उपलब्ध हैं, इसलिए हम इस तरह का आपरेशन कर पाते हैं। उन्होंने कहा कि इस आपरेशन में माइक्रोस्कोप में कटे हुए
अंग को देखकर जोड़ा जाता है। पहले हड्डी को जोड़ा जाता है, फिर खून की नस को और इसके बाद टेंडन और नर्व को जोड़ा जाता है। हड्डी को जोड़ने के बाद पतली नस को जोड़ा जाता है। पतली नस को जोड़ने के वक्त इसका विशेष रूप से ध्यान रखा जाता है कि कहीं नस में खून की आवाजाही बंद तो नहीं हो रही है। खून बंद होने पर सब किया कराया बेकार हो जाता है, इसलिए यहां पर विशेष सावधानी बरतनी पड़ती है। इन नसों को नये सिरों से नहीं जोड़ा जा सकता है।
उन्होंने कहा कि कटे हुए अंगों को जोड़ने में समय काफी महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने बताया कि जैसे ही किसी का अंग कट जाए तो उसे साफ-सुथरे पालिथिन में डाल कर आइसपैक मे रख देना चाहिए तथा मरीज को जल्द से जल्द हाॅस्पिटल पहुंचाना चाहिए जहां माइक्रो सर्जरी की सुविधा उपलब्ध हो। उन्होंने कहा कि समय अधिक बीत जाने पर यह आॅपरेशन संभव नहीं हो पाता है। उन्होंने कहा कि यदि तेज धार वाली चीज से अंग कट जाए तो उसे जोड़ा जा सकता है, लेकिन अंग दबकर या कुचलकर अलग हो जाए तो उसे जोड़ना और भी ज्यादा मुश्कील हो जाता है।
इस मौके पर अस्पताल के रीजनल डायरेक्टर डाक्टर तलत हलीम ने कहा कि पारस हास्पिटल हमेशा से बिहार के लोगों को उच्च स्तरीय मेडिकल सुविधाए दिलाने के लिए प्रतिब़द्ध है। हम बिहार के पहले हास्पिटल हैं जिन्होने एनएबीएच की मान्यता प्राप्त की है। हमारे पास 24 घंटे इमरजेंसी और विशेषज्ञ डाक्टरों की टीम उपलब्ध है। ऐसी परिस्थिति में आवश्यक है कि मरीज़ जल्द से जल्द अस्पताल पहूंचे, इलाज जितनी जल्दी शुरू होगा उस अंग को नुकसान उतना ही कम होगा। ऐसे पहले 90 मिनट काफी महत्वपूर्ण हैं।