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Press Coverage

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Apr 25, 2022

पारस हॉस्पिटल गुडगाँव में मानव भस्म से बने अंग लगा रहे हैं अंगदान की गुहार

पारस हॉस्पिटल गुडगाँव  में मानव भस्म से बने अंग लगा रहे हैं अंगदान की गुहार

पारस हॉस्पिटल में लगे आंखए लिवरए फेफडे और किडनी के आर्ट फॉर्म कर रहे हैं लोगोँ का ध्यान आकर्षित। इन अंगोँ को वाराणसी के घाटोँ से लिए गए मानव भस्म से बनाया गया है जिसका उद्देश्य है अंगदान के प्रति लोगोँ के हृदय में भाव जगाना

गुडगांवए 19 जुलाई 2018श् भारत में हर साल 5 लाख लोग सिर्फ इसलिए अपनी जान गंवा देते हैं क्योंकि उन्हेँ प्रत्यारोपण के लिए अंग नहीं मिल पाता हैए यहाँ अंगदान की दर बेहद कम है। इस महान अभियान पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित करते हुए और दिल को छू लेने वाली अपील के साथ पारस हॉस्पिटल्स गुडगांव ने मोहन फाउंडेशन के अनोखे अभियान के साथ हाथ मिलाया है जिसके तहत मानव भस्म से बने चार अंग यहाँ लगाए गए हैं। ये चार अंगए जिनमेँ आंखए लिवरए फेफडे और किडनी शामिल हैए इन अंगोँ को बनारस के घाटोँ से मानव भस्म लेकर तैयार किया गया है जिसका उद्देश्य है ष्मृत्य के पहले जीवनष्के संदेश को लोगोँ के दिल तक पहुंचाना।  प्रसार करनाए ताकि इन्हेँ देखकर लोगोँ का दिल पसीजे। यह ऑर्गन आर्ट फॉर्म लोगोँ के दिल में कौतूहल पैदा कर रहा है।

पारस हॉस्पिटलए गुडगांव के नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉण् पीण् एनण् गुप्ता कहते हैंएश्हमने लोगोँ की जिज्ञासा और चेतना जगाने वाली अपील के लिए यह गम्भीर कदम उठाया हैए क्योंकि सामाजिक.सांस्कृतिक कारणोँ के चलते आज भी इस देश में लोग इस महादान से दूर रहते हैं। लोक सभा में प्रस्तुत अनुमानोँ के अनुसारए भारत में 2 लाख किडनीए 30ए000 लिवर और 50ए000 हार्ट ट्रांसप्लांट की जरूरत हैए लेकिन इसके विपरीत उपलब्धता क्रमशः 6000ए 1500 और 15 अंगोँ की है। ये तथ्य यह साबित करते हैं कि देश में प्रत्यारोपण के लिए कितने अंगोँ की जरूरत है और उपलब्धता कितनी कम है। हम सबको अपने अंगोँ को दान करने का संकल्प लेना चाहिए ताकि हम दुनिया से चले जाने के बाद भी दुनिया के काम आ सकेँ।श्

दुनिया भर में सडक दुर्घटर्नाओँ के चलते होने वाली मौतोँ में सबसे अधिक मामले भारत के होते हैंए यहाँ हर साल सडक दुर्घटना के चलते हर साल 1ण्46 लाख लोग मारे जाते हैंए इसका मतलब हैए हर रोज 400 मौतेँ। हर साल इन 1ण्4 लाख सडक दुर्घटना के शिकार हुए लोगोँ में से 70ः को ब्रेन डेड घोषित किया जाता है। यानि कि यहाँ हर साल 1 लाख सम्भावित कैडेवरिक ऑर्गन डोनर होते हैं।

एक लाख डोनर 2 लाख किडनीए 1 लाख लिवरए 1 लाख हार्ट और 2 लाख आंखेँ दान कर सकते हैंए जिससे देश में प्रत्यारोपण के लिए अंगोँ की कमी पूरी तरह से दूर हो सकती है। यहाँ तक कि अतिरिक्त बचे अंगोँ को अन्य सार्क देशोँ को भी दान किया जा सकता हैए जहाँ भारत जैसी ही समस्या है। लेकिन दुर्भाग्यवशए इनमेँ से 2.3ः अंगोँ का ही उपयोग हो पाता हैए बाकी के अंग खराब हो जाते हैं।


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