Apr 25, 2022
वर्ल्ड किडनी डे पर पारस हाॅस्पिटल ने निकाला बच्चों का मार्च
- अंगदान (किडनी) के लिए स्कूली बच्चों ने मौर्य लोक परिसर से रेड क्राॅस भवन तक निकाला मार्च
- पारस के इंस्टीच्यूट आॅफ युरोलाॅजी, नेक्रोलाॅजी एंड किडनी ट्रांसप्लांट के डायरेक्टर डाॅ. अजय कुमार ने कहा, किडनी दान में महिलाएं अव्वल
- दर्द निवारक दवाएं बिना सलाह न खाएं, डायबिटीज व बी.पी. को नियंत्रित रखें तथा प्रदूशित भोजन न लें तो किडनी खराबी से बचा जा सकता है
पटना, 07 मार्च 2018। वर्ल्ड किडनी डे के मौके पर पारस एचएमआरआई सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल, राजाबाजार, पटना में अंगदान के प्रति लोगों में जागरूकता जगाने के लिए गुरूवार की सुबह 7.30 बजे मौर्य लोक परिसर से गांधी मैदान स्थित रेड क्राॅस भवन तक 500 स्कूली बच्चों का मार्च निकाला। बच्चों के इस प्रदर्शन में पारस एचएमआरआई अस्पताल के इंस्टीच्यूट आॅफ यूरोलाॅजी, नेक्रोलाॅजी एंड ट्रांसप्लांट के डायरेक्टर डाॅ. अजय कुमार के साथ अस्पताल के कई डाॅक्टर शमिल हुए।

इस मौके पर डाॅ. अजय कुमार ने कहा कि अपने देश में पुरूशों की अपेक्षा महिलाएं ज्यादा अंगदान (किडनी दान) करती हैं, इसलिए हम लोगों के इस मार्च का मुख्य उद्देश्य है पुरूशों में भी अंगदान के लिए जागरूकता जगाना। उन्होंने कहा कि चूंकि महिलाएं सबसे ज्यादा अंगदान करती है, इसलिए इसबार के वल्र्ड किडनी डे का थीम है ‘किडनी और वीमेंस हेल्थ’। महिलाएं बहुत ही दानशील होती हैं तथा पारिवारिक काम में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेती हैं, फिर भी यह समाज उन्हें इतना सम्मान नहीं दे पाता है जितने की वे हकदार हैं। देश में आज जितना भी किडनी दान होता है उसमें से 80 फीसदी किडनी महिलाएं ही देती हैं चाहे वो मां हो, पत्नी हो या बहन। अविवाहित बहन तो सबसे ज्यादा किडनी दान करती हैं। इसलिए महिलाओं को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहना आवश्यक है। उनका सशक्तीकरण होना चाहिए। अगर महिलाएं स्वस्थ नहीं रहेगी तो किडनी देने का यह पुनीत कार्य कौन करेगा?
देश में किडनी मरीजों की संख्या की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि देश में 4 से लेकर 17 फिसदी लोग किडनी की बीमारी से ग्रसित है। अनुमान के अनुसार एक लाख में से 5 से लेकर 25 मरीज को किडनी ट्रांसप्लांट की आवश्यकता होती है। पूरे देश में डेढ़ लाख किडनी मरीज किडनी ट्रांसप्लांट का इंतजार करते हैं। बिहार में किडनी के मरीज की संख्या बढ़ती जा रही है। इसका कारण है वायू प्रदूशण, जल प्रदूशण एवं प्रदूशित भोजन है। प्रदूशित भोजन से मतलब है कि केमिकल देकर तैयार किये गये फल, सब्जी और अनाज का इस्तेमाल एवं भोजन में केमिकल का प्रयोग।

किडनी खराब होने के कारण का जिक्र करते हुए डाॅ. अजय ने कहा कि दर्द निवारक दवा का कम से कम इस्तेमाल करना चाहिए क्योंकि इन दवाओं के ज्यादा इस्तेमाल से किडनी खराब होने की संभावना बनी रहती है। उन्होंने कहा कि महिलाएं दर्द निवारक दवा खाकर घर का काम करती रहती है, इसलिए उनसे आग्रह है कि वे ऐसा न करें। डायबिटीज रोगी को अपनी, बीमारी को नियंत्रित रखना चाहिए अन्यथा, इसका भयंकर असर किडनी पर पड़ता है। बी.पी. अगर ज्यादा दिन तक बढ़ा रहे तो इसका भी असर किडनी पर पड़ता है। किडनी खराब होने पर ब.पी. भी नियंत्रित नहीं हो पाता है क्योंकि किडनी से निकलने वाला एक पदार्थ इसे नियंत्रण में नहीं आने देता है। गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को नियमित तौर पर पेशाब की जांच करानी चाहिए। यदि इसमें इंफेक्षन हो तो विशेषज्ञ डाॅक्टर से इलाज कराएं। क्योंकि इस अवस्था में महिलाओं में किडनी खराब होने का ज्यादा डर रहता है। इसलिए महिलाको यूरिनरी ट्रैक् इंफेक्षन को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
भोजन के बारे में उन्होंने कहा कि आॅरगैनिक रूप से उपजाए फल, सब्जी और अनाज का इस्तेमाल करना चाहिए। जंक फूड नहीं खाना चाहिए। चाउमिन बगैरह का कम से कम इस्तेमाल करना चाहिए। चाइनिज में अजीमोमोंटा होता है जो किडनी के लिए हानिकारक है। पानी पीने के बारे में उन्होंने कहा कि इतना पानी पीयें जिससे कि आपका पेशाब पानी की तरह साफ हो। इससे किडनी में पथरी से भी बचाव होता है