Apr 25, 2022
दवाओँ का बढता दुरुपयोग और एचसीवी.संक्रमित नशाखोरोँ के सम्बंध में आंकडोँ का अभाव बना गुडगांव के युवाओँ के लिए खतरा रू पारस हॉस्पिटल गुडगाँव की टिप्पणी
इंट्रावीनस ड्रग यूजर्स ;आईडीयूद्ध को हेपटाइटिस सी होने का खतरा काफी ज्यादा रहता हैए क्योंकि यह अनस्टेरलाइज्ड और इस्तेमाल की हुई सीरिंज के जरिए फैलता है।
हरयाणा में ड्रग एडिक्ट लोगोँ की संख्या साल 2010 में 774 थी जो कि वर्ष 2016 म्न बढकर 3ए707 हो गईय लेकिन ऐसे ड्रग एडिक्ट्स जो नारकोटिक्स लेने के लिए इंजेक्शन का इस्तेमाल करते हैं उनमेँ हेपटाइटिस का प्रसार कितना हैए इस सम्बंध में कोई आंकडा उपलब्ध नहीँ है।
हरयाणा सरकार ने वर्ष 2013 में ष्जीवन रेखाष्कार्यक्रम की शुरुआत की थीए जिसका उद्देश्य पिछ्डी जाति ;एससीद्ध और गरीबी रेखा से नीचे गुजर करने वालोँ ;बीपीएल श्रेणीद्ध के लिए निशुल्क हेपटाइटिस जांच सुविधा मुहैया कराना है।
गुडगांवए 27 जुलाई 2018रूपिछले 7 वर्षोँ में ड्रग एडिक्ट्स लोगोँ की संख्या में लगातार बढोत्तरी और इसके साथ ही इंट्रावीनस ड्रग यूजर्स ;आईडीयूद्ध के बीच हेपटाइटिस सी ;एचसीवीद्ध के प्रसार सम्बंधी आंकडोँ के अभाव के चलते गुडगांव एक ऐसी स्थिति में पहुंच चुका है जहाँ हेपटाइटिस का संक्रमण तेजी से फैलने की आशंका काफी बढ गई है।
स्टेट ड्रग डिपेंडेंस ट्रीटमेंट सेंटर ;एसडीडीटीसीद्धए रोहतक के आंकडोँ के अनुसारए हरयाणा में वर्ष 2010 में ड्रग एडिक्ट्स की संख्या 774 थी जि कि वर्ष 2016 में बढकर 3ए707 हो गईए यानि कि संख्या में 450 पर्सेंट का इजाफा हुआ है। वर्ष 2017 मेंए गुडगांव जिले में करीब 500 नशाखोरोँ का इलाज किया गया है।
पारस हाॅस्पिटल, गुड़गांव में गैस्ट्रोएंटेरोलाॅजीए विभाग के प्रमुख डाॅ. रजनीश मोंगा बताते हैं का कहना है किएश्विश्व स्वास्थ्य संगठन ;डब्ल्युएचओद्ध ने यह पाया है कि दुनिया भर में वायरल हेपेटाइटिस से होने वाली मौतोँ की संख्या एड्स और ट्युबरोकुलोसिस से कहीँ अधिक होती है। जिले में पिछ्ले कुछ वर्षोँ के दौरान दवाओँ के ड्रग के दुरुपयोग के मामले काफी बढ गए हैं और इसके साथ हेपटाइटिस सी से प्रभावित नशाखोरोँ की संख्या की जानकारी उपलब्ध न होने के कारण उन तक हेपटाइटिस सी उपलब्ध इलाज के विकल्पोँ का फायदा भी नहीं पहुंच पाता है। इस स्थिति का युवा पीढी पर दूरगामी परिणाम होगा और यह हेपटाइटिस के प्रसार का पता लगाने के मामले में भी अहितकर होगा।श्
वर्ष 2013 मेंए हरयाणा सरकार ने ष्जीवन रेखाष्कार्यक्रम की शुरुआत कीए इस परियोजना का उद्देश्य है पिछ्डी जाति ;एससीद्ध और गरीबी रेखा से नीचे गुजर करने वाले ;बीपीएलद्ध लोगोँ के लिए हेपटाइटिस सी का निशुल्क इलाज उपलब्ध कराना। सामान्य श्रेणी के वे लोग जो पिछ्ले साल से सब्सिडाइज्ड दर पर इलाज का लाभ उठा रहे हैं वे निशुल्क इलाज का लाभ ले सकते हैं। इस साल के शुरुआत में इस परियोजना को हरयाणा के 21 जिलोँ में प्रसारित कर दिया गया थाए जिसके साथ ही हरयाणा पहला ऐसा राज्य बन गया है जो हेपटाइटिस सी मरीजोँ को निशुल्क इलाज उपलब्ध करा रहा है।
गैस्ट्रोएंटेरोलाॅजी विभाग के प्रमुख डाॅ. रजनीश मोंगा बताते हैं कहते हैंए श्हेपटाइटिस सी का इलाज उपलब्ध है लेकिन हमेँ इस बात को लेकर पूरी सावधानी बरतनी चाहिए हेपटाइटिस बी के प्रसार के लिए अनस्टेरलाइज्ड सीरिंज का इस्तेमाल एक बडा कारण है और इस बीमारी को कोई निश्चित इलाज भीउपलब्ध नहीं है।श्
हेपटाइटिस ए और ई के लिए सिर्फ सहयोगी इलाज उपलब्ध है लेकिन हेपटाइटिस सी के लिए प्रभावी थेरेपी भी उपलब्ध है। हेपटाइटिस ए और बी के लिए टीका उपलब्ध है लेकिन हेपटाइटिस ई का टीका अब भी ट्रायल के चरण में हैए जो बहुत जल्द उपलब्ध हो सकता है।
एक अनुमान के अनुसार भारत में 12 मिलियन लोग हेपटाइटिस सी से प्रभावित हैंए जो कि एचआईवीध्एड्स के मरीजोँ की संख्या से 10 गुना अधिक है। हेपटाइटिस सी के वायरस एड्स की तुलना में 10 गुना अधिक स्न्क्रामक होते हैं जिसे एक साइलेंट किलर माना जाता है क्योंकि लक्षण तब सामने आने शुरू होते हैं जब बीमारी क्रॉनिक स्टेज में पहुंच जाती है। करीब एक प्रतिशत आबादी इस वायरस को अपने साथ लेकर चल रही हैबिना इसके बारे में जानेए जबकि एक ब्लड टेस्ट से इस वायरस की मौजूदगी का पता लगाया जा सकता है।
हेपटाइटिस लिवर का इंफ्लेमेशन होता है जिसके चलते लिवर फाइब्रोसिस ;स्कारिंगद्धए सिरोसिस अथवा लिवर कैंसर भी हो सकता है। हेपटाइटिस के कई प्रकार होते हैं जैसे कि हेपटाइटिस एए बीए सीए डी और ई। ए और ई जलजनित बीमारी है और यह संक्रमित पानी और खाने की चीजोँ से फैलती हैए जिसका इलाज दवाओँ के जरिए किया जाता है। हेपटाइटिस बीए सी और डी रक्त संचारी बीमारियाँ हैं। हेपटाइटिस डी का संक्रमण तभी होता है जब हेपटाइटिस बी हुआ हो।
लिवर को स्वस्थ्य रखने के लिए संतुलित आहार के साथ.साथ हर रोज 30 मिनट व्यायाम करना चाहिए। अल्कोहक के अलावा जीवनशैली भी लिवर सम्बंधी बीमारियोँ के लिए जिम्मेदार होती है। डायबीटीज से फैटी लिवर की समस्या बढ जाती है और लिवर की बीमारियोँ से बचाव के लिए वजन पर नियंत्रण रखना बेहद जरूरी है।
पारस हॉस्पिटल गुडगांव भारत के उन अग्रणी अस्पतालोँ में शामिल है जहाँ न्युरोसाइंसेजए कार्डियोलॉजीए ऑर्थोपेडिकए नेफ्रोलॉजीए गैस्ट्रोइंटेरोलॉजी और क्रिटिकल केयर की बेहतरीन सुविधा उपलब्ध है।