Apr 25, 2022
देश में प्रदूषण से बढ़ रहे दमा के मरीज: पारस हाॅस्पीटल
- दमा दिवस पर पारस एमआरआई सुपर स्पेशिलिटी हाॅस्पिटल के डाॅ. प्रकाश सिन्हा ने कहा, वायु व पर्यावरण प्रदूषण से बढ़ रहे मरीज
अनुवांशिक के अलावा बचपन में लंग्स में बार-बार इंफेक्शन के कारण भी होती है दमा की बीमारी, शरीर में इम्युन सिस्टम के कमजोर पड़़ने से भी होती है यह बीमारी
पटना 2 मई 2018: वायु और पर्यावरण प्रदूषण के कारण देश में दमा के मरीजों की संख्या दिन-दिन बढ़ती जा रही है, इसलिए दमा की बीमारी से बचाने के लिए लोगों को धूल और धूलकण से बचना चाहिए।
विश्व में तीन सौ मिलियन लोग दमा की बीमारी से पीड़ित हैं। साथ ही इस बीमारी से मौत में 80 फीसदी मौत मध्यम और गरीब देशों में होती है। शुरूआती दौर में इस बीमारी के ठीक होने की पूरी संभावना होती है बशर्ते कि मरीज दवा के साथ परहेज पर भी ध्यान दे। दमा दिवस पर 2 मई बुधबार को पारस एचएमआरआई सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल के डाॅ. प्रकाश सिंहा ने ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि दमा अनुवांशिकी होता है तथा बचपन में लंग्स में बार-बार इंफेक्शन के कारण भी यह बीमारी होती है। ये इंफेकशन निमोनिया के रूप में बच्चों में होता है। एलर्जी के कारण भी दमा की बीमारी होती है। इसके अलावा शरीर के इम्यून सिस्टम के कमजोर पड़़ जाने पर भी यह बीमारी होती है।
डाॅ. सिंहा ने कहा कि दमा चार तरह के होते हैं। पहला – इंटरमिडेंट – इसमें रोगी का कभी-कभी लंग्स फूलता है। दूसरा- माइल्ड परसिसटेन्ट – इसमें हप्ता में एक बार ही दम फूलता है। तीसरा-माॅडरेट परसिसटेन्ट-इसमें प्रतिदिन सांस फूलता है। चैथा-सिवियर परसिसटेन्ट – इसमें मरीज केाई काम तेजी में नहीं कर सकता। क्योंकि इसमें हर वक्त सांस फूलता है। दमा से बचाव और परहेज की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि मरीज को जिस चीज से एलर्जी है उससे परहेज करना चाहिए। इसके अलावा वायु प्रदूषण से दूर रहना चाहिए। फिर भी अगर दम फूलता है तो इनहेलर का इस्तेमाल करना चाहिए। मरीज को नूडल्स, प्राॅन नहीं खाना चाहिए। व्यायाम करने से पहले इनहेलर का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए अन्यथा व्यायाम के समय ज्यादा दम फूलने की संभावना बनी रहती है। कोल्ड ड्रिंक्स नहीं पीना चाहिए। ठंडा पानी, ठंडा दही वगैरह खाने से भी परहेज करना चाहिए। अगर दही खाना है तो बिना ठंडा दही दाल या सब्जी में मिलाकर खा सकते हैं। मौसम के बदलने के समय मरीज को ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है। जाड़े के मौसम में ठंड से बचने का हर संभव प्रयास करना चाहिए। ऐसे मौसम में अगर दम फूलने लगे तो जरूरत पड़ने पर इनहेलर लेनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि पारस एचएमआरआई हाॅस्पिटल में एलर्जी टेस्टिंग मशीन आ रही है, उससे जांच शुरू की जायेगी तो एलर्जी से दम फूलने वालों के इलाज में काफी मदद मिलेगी। इसे अलावा ऐसे मरीजों के लिए इम्यून थेरेपी की व्यवस्था भी है जिसका कोर्स 2-3 साल का है। इस थेरेपी से 70 से 80 फीसदी मरीजों को फायदा होता है। उन्होंने कहा कि पारस में इलाज के लिए कई प्रकार के उपकरण और सुविधायें मौजूद है जिसमें मरीजों को काफी लाभ होता है।