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प्रीडायबिटीज़ क्या है? लक्षण, कारण और बचाव के उपाय

प्रीडायबिटीज़ क्या है? लक्षण, कारण और बचाव के उपाय
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By Dr. Neeraj Sinha in Endocrinology

Feb 21, 2026

क्या हाल ही में आपकी ब्लड शुगर रिपोर्ट में लिखा आया है कि शुगर थोड़ी ज्यादा है लेकिन डायबिटीज़ नहीं है?
अगर हाँ, तो यह प्रीडायबिटीज़ हो सकता है।

यह शब्द सुनकर डर लग सकता है, लेकिन अच्छी खबर यह है कि प्रीडायबिटीज़ ज्यादातर मामलों में रिवर्स की जा सकती है। सही समय पर सही कदम उठाने से आप टाइप 2 डायबिटीज़ को रोक सकते हैं।

इस विस्तृत गाइड में हम आसान भाषा में समझेंगे:

        प्रीडायबिटीज़ क्या है?

        इसके लक्षण क्या हैं?

        शुगर लेवल कितना होने पर प्रीडायबिटीज़ कहा जाता है?

        इसके कारण क्या हैं?

        क्या यह ठीक हो सकती है?

        और इसे रोकने के प्राकृतिक उपाय क्या हैं?

चलिए एक-एक करके समझते हैं।

प्रीडायबिटीज़ क्या है?

प्रीडायबिटीज़ वह स्थिति है जब आपके रक्त में शुगर का स्तर सामान्य से अधिक होता है, लेकिन इतना अधिक नहीं कि उसे टाइप 2 डायबिटीज़ कहा जाए।

इसे आप एक चेतावनी संकेत समझिए।

आपका शरीर इंसुलिन हार्मोन का सही तरीके से उपयोग नहीं कर पा रहा होता। इंसुलिन वह हार्मोन है जो खून में मौजूद ग्लूकोज को कोशिकाओं तक पहुंचाकर ऊर्जा में बदलता है।

अगर इस स्थिति को अनदेखा किया जाए, तो धीरे-धीरे यह टाइप 2 डायबिटीज़, हृदय रोग और अन्य जटिलताओं में बदल सकती है।

प्रीडायबिटीज़ में ब्लड शुगर लेवल कितना होता है?

डॉक्टर साधारण ब्लड टेस्ट से प्रीडायबिटीज़ का पता लगाते हैं।

1. फास्टिंग ब्लड शुगर

        100 mg/dL से कम = सामान्य

        100–125 mg/dL = प्रीडायबिटीज़

        126 mg/dL या अधिक = डायबिटीज़

2. HbA1c टेस्ट

        5.7% से कम = सामान्य

        5.7%–6.4% = प्रीडायबिटीज़

        6.5% या अधिक = डायबिटीज़

3. OGTT (2 घंटे बाद शुगर टेस्ट)

        140 mg/dL से कम = सामान्य

        140–199 mg/dL = प्रीडायबिटीज़

        200 mg/dL या अधिक = डायबिटीज़

अगर आपकी रिपोर्ट इन बीच के स्तर में है, तो समझिए कि अब सावधानी बरतने का समय है।

प्रीडायबिटीज़ के कारण क्या हैं?

प्रीडायबिटीज़ का मुख्य कारण है इंसुलिन प्रतिरोध

इसका मतलब:

        शरीर इंसुलिन बना रहा है

        लेकिन कोशिकाएं इंसुलिन पर सही प्रतिक्रिया नहीं दे रही

        परिणाम: खून में शुगर बढ़ने लगती है

सामान्य कारण:

        अधिक वजन या मोटापा

        पेट के आसपास चर्बी

        शारीरिक गतिविधि की कमी

        ज्यादा मीठा और प्रोसेस्ड फूड

        परिवार में डायबिटीज़ का इतिहास

        महिलाओं में PCOS

        हाई ब्लड प्रेशर

        हाई कोलेस्ट्रॉल

आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली इसका बड़ा कारण है।

प्रीडायबिटीज़ के लक्षण

सबसे बड़ी समस्या यह है कि अधिकांश लोगों में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते।

फिर भी कुछ संकेत हो सकते हैं:

        बार-बार प्यास लगना

        ज्यादा पेशाब आना

        सामान्य से ज्यादा थकान

        हल्का धुंधला दिखना

        घाव देर से भरना

        गर्दन या बगल में काले धब्बे

अक्सर लोगों को इसका पता रूटीन हेल्थ चेकअप में चलता है।

किन लोगों को ज्यादा खतरा है?

अगर आप:

        35 वर्ष से अधिक हैं

        ओवरवेट हैं

        परिवार में डायबिटीज़ है

        हाई बीपी है

        गर्भावस्था में शुगर रही हो

        PCOS है

        शारीरिक रूप से कम सक्रिय हैं

तो आपको नियमित जांच करानी चाहिए।

भारत में कम उम्र में भी प्रीडायबिटीज़ तेजी से बढ़ रही है।

क्या प्रीडायबिटीज़ ठीक हो सकती है?

हाँ यही इसकी सबसे अच्छी बात है।

डायबिटीज़ की तुलना में प्रीडायबिटीज़ को लाइफस्टाइल बदलाव से रिवर्स किया जा सकता है।

अगर आप अपने शरीर के वजन का सिर्फ 5–7% कम कर लें, तो टाइप 2 डायबिटीज़ का खतरा काफी कम हो जाता है।

उदाहरण:
अगर आपका वजन 80 किलो है, तो 4–5 किलो वजन कम करना ही पर्याप्त है।

प्रीडायबिटीज़ से बचाव के उपाय

1. स्वस्थ वजन बनाए रखें

        पेट की चर्बी कम करें

        क्रैश डाइट से बचें

        धीरे-धीरे और स्थायी बदलाव करें

2. संतुलित आहार लें

क्या खाएं:

साबुत अनाज
 
हरी सब्जियां
 
सीमित मात्रा में फल
 
दाल और प्रोटीन
 
स्वस्थ वसा

क्या कम करें:

मीठे पेय
 
सफेद आटा
 
ज्यादा मिठाई
 
प्रोसेस्ड स्नैक्स

3. नियमित व्यायाम

        रोज 30 मिनट तेज चलना

        हफ्ते में 5 दिन

        सप्ताह में 2 दिन हल्का स्ट्रेंथ ट्रेनिंग

छोटी-छोटी गतिविधियां भी मदद करती हैं।

4. चीनी कम करें

पैकेज्ड जूस, सॉस, बिस्किट में छिपी हुई शुगर होती है।

5. अच्छी नींद लें

        7–8 घंटे की नींद

        तय समय पर सोना-जागना

6. तनाव कम करें

तनाव शुगर बढ़ा सकता है।

        योग

        ध्यान

        गहरी सांस

        डिजिटल डिटॉक्स

7. नियमित जांच

        फास्टिंग शुगर

        HbA1c

        लिपिड प्रोफाइल

  •    ब्लड प्रेशर

अगर प्रीडायबिटीज़ को नजरअंदाज किया जाए तो?

        टाइप 2 डायबिटीज़

        हृदय रोग

        स्ट्रोक

        किडनी रोग

        नसों की क्षति

यह बदलाव 5–10 साल में हो सकता हैकभी-कभी उससे भी जल्दी।

भारत में प्रीडायबिटीज़ क्यों बढ़ रही है?

        हाई-कार्ब डाइट

        बैठी हुई जीवनशैली

        शहरी तनाव

        जेनेटिक कारण

        कम स्क्रीनिंग

अब 20–30 साल के युवा भी इससे प्रभावित हो रहे हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य (Key Facts)

        लाखों लोग बिना जाने प्रीडायबिटीज़ से ग्रस्त हैं।

        5–7% वजन घटाने से बड़ा फर्क पड़ता है।

        नियमित व्यायाम इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ाता है।

        HbA1c टेस्ट से आसानी से पता चलता है।

समय पर कदम उठाने से डायबिटीज़ रोकी जा सकती है।

निष्कर्ष

प्रीडायबिटीज़ कोई बीमारी नहींबल्कि चेतावनी है।

यह आपके शरीर का संकेत है कि अब समय है बदलाव का।

सही खानपान, नियमित व्यायाम और समय-समय पर जांच से आप टाइप 2 डायबिटीज़ को रोक सकते हैं।

FAQs

प्रीडायबिटीज़ क्या है?

यह वह स्थिति है जब ब्लड शुगर सामान्य से ज्यादा लेकिन डायबिटीज़ से कम होता है।

क्या प्रीडायबिटीज़ ठीक हो सकता है?

हाँ, लाइफस्टाइल बदलाव से अक्सर रिवर्स किया जा सकता है।

HbA1c कितना होने पर प्रीडायबिटीज़ होता है?

5.7% से 6.4% के बीच।

क्या इसके लक्षण होते हैं?

अक्सर नहीं। इसलिए नियमित जांच जरूरी है।

क्या पतले लोगों को भी हो सकता है?

हाँ, इंसुलिन रेजिस्टेंस किसी को भी हो सकता है।

कितने समय में डायबिटीज़ बन सकता है?

आमतौर पर 5–10 साल, लेकिन यह व्यक्ति पर निर्भर करता है।

क्या दवा जरूरी है?

पहले लाइफस्टाइल सुधार। जरूरत होने पर डॉक्टर दवा दे सकते हैं।

कौन-सा व्यायाम बेहतर है?

तेज चलना सबसे आसान और प्रभावी है।

क्या फल खा सकते हैं?

हाँ, लेकिन सीमित मात्रा में।

कितनी बार जांच करानी चाहिए?

6–12 महीने में एक बार, या डॉक्टर की सलाह अनुसार।

Neeraj Sinha
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Dr. Neeraj Sinha
Consultant - ENDOCRINOLOGY
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