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डॉ. रितेश यादव - परामर्शदाता

डॉ. रितेश यादव

सलाहकार - आंतरिक चिकित्सा

एमडी (चिकित्सा)एमबीबीएस

पारस हेल्थ गुरुग्राम

डॉ. रितेश यादव के बारे में

डॉ. रितेश यादव, एमडी (मेडिसिन), एमबीबीएस, 14 से अधिक वर्षों के नैदानिक अनुभव के साथ एक अनुभवी चिकित्सा पेशेवर हैं। अपने शानदार करियर के दौरान, उन्होंने आरएमएल अस्पताल दिल्ली, इन्स्कल अस्पताल (चंडीगढ़), मैक्स सुपरस्पेशलिटी अस्पताल (दिल्ली), और पार्क अस्पताल गुरुग्राम जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं में सेवा प्रदान की है। डॉ. यादव की उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता गुरुग्राम में पारस हेल्थ से जुड़ने से पहले एमआरसीपी प्रशिक्षण के लिए पाठ्यक्रम पर्यवेक्षक के रूप में उनकी भूमिका में स्पष्ट है। एक करुणामय दृष्टिकोण के साथ, वे संक्रामक और जीवनशैली से संबंधित बीमारियों के प्रबंधन में विशेषज्ञ हैं, और अपने रोगियों के लिए व्यापक देखभाल सुनिश्चित करते हैं। 

 

विशेषज्ञता और दक्षता: 

  • आंतरिक चिकित्सा 
  • संक्रामक रोग 
  • जीवनशैली से संबंधित बीमारियाँ 

 

प्रमाणपत्र: 

  • एमआरसीपी प्रशिक्षण पर्यवेक्षक 
  • संक्रामक रोगों में विशेषज्ञ 
  • उन्नत आंतरिक चिकित्सा 

 

पुरस्कार एवं मान्यताएँ: 

  • चिकित्सा में उत्कृष्टता पुरस्कार 
  • विशिष्ट सेवा मान्यता
  • उत्कृष्ट योगदान स्वीकृति 

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पुरस्कार और मान्यता

पारस हेल्थ
चिकित्सा में उत्कृष्टता पुरस्कार
पारस हेल्थ
विशिष्ट सेवा मान्यता
पारस हेल्थ
उत्कृष्ट योगदान स्वीकृति

वेल्नेस ब्लॉग

बुखार हमारे शरीर का एक प्राकृतिक रक्षा तंत्र है। जब शरीर किसी संक्रमण या बीमारी से लड़ रहा होता है, तो शरीर का तापमान बढ़ जाता है। लेकिन अगर किसी व्यक्ति को बार-बार बुखार आना शुरू हो जाए, तो यह सामान्य नहीं है। यह किसी छिपी हुई बीमारी या संक्रमण का संकेत हो सकता है।
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गर्मियों के मौसम में अक्सर लोग हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन, चक्कर और ज्यादा पसीना आने जैसी समस्याओं का सामना करते हैं। इन सभी का एक बड़ा कारण है – हाइपरथर्मिया (Hyperthermia)। हाइपरथर्मिया का मतलब है – शरीर का तापमान असामान्य रूप से बढ़ जाना, जब शरीर खुद को ठंडा नहीं कर पाता। यह स्थिति गंभीर हो सकती है और समय पर इलाज न मिलने पर जानलेवा भी साबित हो सकती है।
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मानसून अपने साथ ठंडी हवाएँ और राहत तो लेकर आता है, लेकिन इसी मौसम में मच्छर जनित रोग तेजी से फैलने लगते हैं। डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया और अन्य संक्रमण हर साल लाखों लोगों को प्रभावित करते हैं। अक्सर लोग तेज बुखार को सामान्य वायरल बुखार समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।
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बारिश का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है, लेकिन इसके साथ कई संक्रामक और मौसमी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। इस मौसम में बढ़ी हुई नमी, जगह-जगह जमा पानी, मच्छरों की संख्या में वृद्धि और दूषित भोजन या पानी के कारण संक्रमण तेजी से फैल सकता है। यही वजह है कि बारिश के मौसम की आम बीमारियां हर साल हजारों लोगों को प्रभावित करती हैं।
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आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मोटापा (Obesity) एक आम लेकिन गंभीर समस्या बन चुका है। गलत खान-पान, कम शारीरिक गतिविधि और तनाव भरी लाइफस्टाइल के कारण वजन तेजी से बढ़ रहा है। शुरुआत में यह सिर्फ “थोड़ा वजन बढ़ना” लगता है, लेकिन धीरे-धीरे यह कई बीमारियों का कारण बन सकता है।
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हम में से ज़्यादातर लोग तब ही शरीर का तापमान नापते हैं, जब बुखार या तबीयत खराब लगती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि सामान्य शरीर का तापमान वास्तव में कितना होता है?
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संक्रामक रोग या संचारी रोग (Sanchari Rog) ऐसी बीमारियाँ हैं जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक संक्रमण (Infection) के माध्यम से फैलती हैं। इन रोगों के मुख्य कारण वायरस (Virus), बैक्टीरिया (Bacteria), फंगस (Fungus) और परजीवी (Parasite) जैसे सूक्ष्मजीव हैं जो हमारी शरीर में घुसकर बीमारी उत्पन्न कर देते हैं।
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हम जो खाना खाते हैं, वही हमारे स्वास्थ्य की नींव तय करता है। अगर भोजन संतुलित हो तो शरीर मज़बूत रहता है और बीमारियाँ पास नहीं आतीं। लेकिन जब पाचन तंत्र (digestive system) गड़बड़ हो जाए, तो कब्ज, गैस, एसिडिटी और अपच जैसी समस्याएँ शुरू हो जाती हैं।
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