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Achalasia (अकलेशिया) क्या है? लक्षण, कारण, जांच और इलाज

Achalasia (अकलेशिया) क्या है? Achalasia (अकलेशिया) क्या है?
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By Dr. Mohnish Kataria in Gastro Sciences

Jul 06, 2026

क्या आपको अक्सर खाना निगलने में दिक्कत होती है? क्या ऐसा लगता है कि खाना या पानी गले में अटक रहा है? कई लोग इसे सामान्य एसिडिटी या गले की छोटी-मोटी समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन अगर यह परेशानी बार-बार हो रही है, तो यह अकलेशिया (Achalasia) नामक एक दुर्लभ लेकिन गंभीर अन्ननली की बीमारी का संकेत हो सकती है।

अकलेशिया में भोजन नली (Esophagus) ठीक तरह से काम नहीं करती, जिससे खाना पेट तक आसानी से नहीं पहुंच पाता। समय रहते सही अकलेशिया की जांच और अकलेशिया का इलाज करवाने से इस बीमारी को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है और मरीज सामान्य जीवन जी सकता है।

इस लेख में हम सरल भाषा में समझेंगे कि अकलेशिया क्या है, इसके लक्षण, कारण, जांच और उपलब्ध उपचार विकल्प क्या हैं।

अकलेशिया (Achalasia) क्या है?

अकलेशिया एक ऐसी स्थिति है जिसमें अन्ननली (Esophagus) भोजन को पेट तक सामान्य तरीके से नहीं पहुंचा पाती। सामान्य रूप से जब हम कुछ खाते या पीते हैं, तो भोजन नली की मांसपेशियां लयबद्ध तरीके से सिकुड़ती और फैलती हैं, जिससे भोजन आसानी से पेट तक पहुंच जाता है। इसके साथ ही अन्ननली और पेट के बीच मौजूद एक वाल्व, जिसे Lower Esophageal Sphincter (LES) कहा जाता है, भोजन के गुजरने के समय खुल जाता है।

लेकिन अकलेशिया में यही वाल्व ठीक से नहीं खुलता। इसके कारण भोजन और तरल पदार्थ अन्ननली में ही रुकने लगते हैं। समय के साथ अन्ननली फैल सकती है और मरीज को खाना निगलने में कठिनाई, खाना गले में फंसना, खाना वापस मुंह में आना और सीने में दर्द जैसी समस्याएं होने लगती हैं।

यह बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है, लेकिन 25 से 60 वर्ष की आयु के लोगों में अपेक्षाकृत अधिक देखी जाती है।

अकलेशिया क्यों होता है? (अकलेशिया के कारण)

अधिकांश मामलों में अकलेशिया के कारण पूरी तरह स्पष्ट नहीं होते। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह बीमारी भोजन नली की नसों के क्षतिग्रस्त होने के कारण विकसित होती है।

संभावित कारणों में शामिल हैं:

नसों को नुकसान

अन्ननली की मांसपेशियों को नियंत्रित करने वाली नसें धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। इससे भोजन नीचे ले जाने वाली सामान्य प्रक्रिया प्रभावित हो जाती है।

ऑटोइम्यून प्रतिक्रिया

कुछ लोगों में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से अपनी ही नसों पर हमला करने लगती है, जिससे अकलेशिया विकसित हो सकता है।

वायरल संक्रमण

कुछ शोध बताते हैं कि कुछ वायरल संक्रमण भी इस बीमारी के विकास में भूमिका निभा सकते हैं, हालांकि इस पर अभी और अध्ययन जारी हैं।

आनुवंशिक कारण

बहुत कम मामलों में यह बीमारी परिवार के अन्य सदस्यों में भी देखने को मिल सकती है, लेकिन अधिकांश मरीजों में इसका पारिवारिक इतिहास नहीं होता।

ध्यान रखें कि अकलेशिया किसी संक्रमण से फैलने वाली बीमारी नहीं है, इसलिए यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलती।

अकलेशिया के शुरुआती लक्षण

अकलेशिया के लक्षण धीरे-धीरे विकसित होते हैं। शुरुआत में परेशानी हल्की होती है, लेकिन समय के साथ बढ़ सकती है।

खाना निगलने में कठिनाई

यह सबसे सामान्य लक्षण है। शुरुआत में केवल ठोस भोजन निगलने में दिक्कत होती है, लेकिन बाद में पानी और अन्य तरल पदार्थ भी निगलना मुश्किल हो सकता है।

खाना गले या सीने में अटकना

मरीज को महसूस होता है कि भोजन बीच में कहीं रुक गया है और नीचे नहीं जा रहा।

खाना वापस मुंह में आना

कई बार बिना उल्टी के भी भोजन वापस मुंह तक जाता है, खासकर लेटने पर।

सीने में दर्द

कुछ लोगों को भोजन करते समय या भोजन के बाद सीने में दर्द या दबाव महसूस हो सकता है।

लगातार खांसी

रात में सोते समय भोजन वापस आने के कारण खांसी या घुटन की समस्या हो सकती है।

वजन कम होना

लंबे समय तक पर्याप्त भोजन कर पाने के कारण वजन तेजी से घट सकता है।

सांस लेने में परेशानी

यदि भोजन या तरल पदार्थ गलती से फेफड़ों में चला जाए, तो बार-बार फेफड़ों का संक्रमण या सांस लेने में तकलीफ हो सकती है।

एसिडिटी जैसी शिकायत

हालांकि कई लोग इसे एसिडिटी समझते हैं, लेकिन यदि निगलने में परेशानी लगातार बनी रहती है, तो इसकी जांच करवाना जरूरी है।

डॉक्टर से कब मिलना चाहिए?

यदि निम्न में से कोई भी समस्या लगातार बनी हुई है, तो गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से जल्द परामर्श लेना चाहिए।

  • लगातार खाना निगलने में दिक्कत होना।
  • पानी पीने में भी परेशानी होना।
  • भोजन बार-बार वापस आना।
  • बिना कारण वजन कम होना।
  • सीने में बार-बार दर्द होना।
  • रात में खांसी या सांस रुकने जैसा महसूस होना।
  • कई सप्ताह तक समस्या बनी रहना।

समय पर अकलेशिया की जांच करवाने से बीमारी की पुष्टि जल्दी हो सकती है और जटिलताओं से बचा जा सकता है।

अकलेशिया की जांच कैसे होती है?

यदि डॉक्टर को अन्ननली की बीमारी का संदेह होता है, तो कुछ विशेष जांचें कराई जाती हैं।

अपर जीआई एंडोस्कोपी (Upper GI Endoscopy)

इस जांच में एक पतली और लचीली ट्यूब, जिसके सिरे पर कैमरा लगा होता है, मुंह के रास्ते अन्ननली और पेट तक पहुंचाई जाती है। इससे डॉक्टर यह देख सकते हैं कि कहीं भोजन नली में रुकावट, सूजन या कोई अन्य बीमारी तो नहीं है।

इसोफेजियल मैनोमेट्री (Esophageal Manometry)

इसे अकलेशिया की पुष्टि के लिए सबसे महत्वपूर्ण जांच माना जाता है।

इस टेस्ट में अन्ननली की मांसपेशियों की ताकत और Lower Esophageal Sphincter (LES) के काम करने की क्षमता को मापा जाता है। इससे पता चलता है कि भोजन नली सामान्य तरीके से काम कर रही है या नहीं।

बेरियम स्वैलो टेस्ट (Barium Swallow Test)

इस जांच में मरीज को एक विशेष प्रकार का तरल पदार्थ पिलाया जाता है, जिसके बाद एक्स-रे लिए जाते हैं। इससे पता चलता है कि भोजन अन्ननली से पेट तक किस तरह पहुंच रहा है।

सीटी स्कैन (जब आवश्यक हो)

कुछ मामलों में डॉक्टर यह सुनिश्चित करने के लिए सीटी स्कैन की सलाह दे सकते हैं कि समस्या किसी अन्य बीमारी के कारण तो नहीं है।

इन सभी जांचों के आधार पर डॉक्टर बीमारी की गंभीरता समझते हैं और मरीज के लिए सबसे उपयुक्त अकलेशिया का इलाज चुनते हैं।

अकलेशिया के प्रकार

विशेषज्ञ Esophageal Manometry की रिपोर्ट के आधार पर अकलेशिया को मुख्य रूप से तीन प्रकारों में विभाजित करते हैं।

टाइप 1 (Classic Achalasia)

इसमें अन्ननली की मांसपेशियां लगभग काम करना बंद कर देती हैं। भोजन नीचे पहुंचने में काफी कठिनाई होती है।

टाइप 2 Achalasia

यह सबसे सामान्य प्रकार है। इसमें अन्ननली में दबाव बढ़ता है लेकिन मांसपेशियां पूरी तरह निष्क्रिय नहीं होतीं। अच्छी बात यह है कि इस प्रकार के मरीज उपचार का बेहतर जवाब देते हैं।

टाइप 3 (Spastic Achalasia)

इस प्रकार में अन्ननली की मांसपेशियां अनियमित और तेज संकुचन करती हैं, जिससे मरीज को निगलने में परेशानी के साथ अधिक दर्द भी हो सकता है।

बीमारी का प्रकार जानना इसलिए महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इसी के आधार पर डॉक्टर तय करते हैं कि POEM, Heller Myotomy, Balloon Dilatation या कोई अन्य उपचार मरीज के लिए अधिक उपयुक्त रहेगा।

अकलेशिया का इलाज कैसे होता है?

यदि आपकी अकलेशिया की जांच में बीमारी की पुष्टि हो जाती है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। अच्छी बात यह है कि आज आधुनिक चिकित्सा में अकलेशिया का इलाज प्रभावी तरीके से किया जा सकता है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि उपचार का उद्देश्य भोजन नली के निचले हिस्से (LES) की जकड़न को कम करना है, ताकि खाना और पानी आसानी से पेट तक पहुंच सके।

डॉक्टर मरीज की उम्र, लक्षणों की गंभीरता, बीमारी के प्रकार और स्वास्थ्य की स्थिति को ध्यान में रखते हुए सबसे उपयुक्त उपचार का सुझाव देते हैं।

1. दवाइयाँ (Medicines)

कुछ मरीजों में शुरुआती या हल्के लक्षण होने पर दवाइयों से अस्थायी राहत मिल सकती है। ये दवाएं भोजन नली के निचले वाल्व को थोड़ा ढीला करने में मदद करती हैं, लेकिन इनका असर सीमित समय तक रहता है। इसलिए इन्हें लंबे समय के समाधान के रूप में नहीं माना जाता।

2. Pneumatic Balloon Dilatation

इस प्रक्रिया में एंडोस्कोपी की मदद से भोजन नली के निचले हिस्से में एक विशेष बैलून पहुंचाकर उसे सावधानीपूर्वक फैलाया जाता है। इससे Lower Esophageal Sphincter (LES) की जकड़न कम होती है और खाना निगलना आसान हो जाता है।

कुछ मरीजों को वर्षों तक आराम मिलता है, जबकि कुछ मामलों में यह प्रक्रिया दोबारा करनी पड़ सकती है।

3. POEM (Per Oral Endoscopic Myotomy)

POEM सर्जरी आज अकलेशिया का इलाज करने के सबसे आधुनिक और प्रभावी तरीकों में से एक मानी जाती है।

इस प्रक्रिया में शरीर पर कोई बाहरी चीरा नहीं लगाया जाता। डॉक्टर एंडोस्कोप को मुंह के रास्ते भोजन नली में ले जाकर अंदर से जकड़ी हुई मांसपेशियों को काटते हैं, जिससे भोजन आसानी से पेट तक पहुंचने लगता है।

POEM के प्रमुख फायदे:

  • शरीर पर कोई बाहरी चीरा नहीं।
  • कम दर्द और कम रक्तस्राव।
  • अस्पताल में कम समय तक भर्ती।
  • जल्दी रिकवरी।
  • सामान्य जीवन में शीघ्र वापसी।

4. Laparoscopic Heller Myotomy

यह भी अकलेशिया की सर्जरी का एक प्रभावी और लंबे समय से सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया जाने वाला विकल्प है।

इसमें पेट पर छोटे-छोटे चीरे लगाकर लैप्रोस्कोपिक तकनीक से भोजन नली की जकड़ी हुई मांसपेशियों को काटा जाता है। कई मामलों में इसके साथ एसिड रिफ्लक्स को रोकने के लिए अतिरिक्त प्रक्रिया (Fundoplication) भी की जाती है।

5. Botulinum (Botox) Injection

जिन मरीजों की उम्र अधिक है या जो सर्जरी के लिए उपयुक्त नहीं हैं, उनमें डॉक्टर बोटुलिनम इंजेक्शन देने की सलाह दे सकते हैं। इससे मांसपेशियां कुछ समय के लिए ढीली हो जाती हैं, लेकिन इसका प्रभाव स्थायी नहीं होता और दोबारा उपचार की आवश्यकता पड़ सकती है।

POEM और Heller Myotomy में क्या अंतर है?

दोनों ही उपचार प्रभावी हैं और मरीज को लंबे समय तक राहत दे सकते हैं। सही विकल्प का चयन मरीज की बीमारी के प्रकार, उम्र, स्वास्थ्य और विशेषज्ञ की सलाह पर निर्भर करता है।

विशेषता

POEM

Heller Myotomy

प्रक्रिया

एंडोस्कोपी द्वारा

लैप्रोस्कोपिक सर्जरी

बाहरी चीरा

नहीं

छोटे चीरे

रिकवरी

अपेक्षाकृत जल्दी

थोड़ी अधिक

अस्पताल में भर्ती

कम

थोड़ा अधिक

प्रभावशीलता

बहुत अच्छी

बहुत अच्छी

उपयुक्त मरीज

अधिकांश प्रकार, विशेषकर Type III

Type I और Type II सहित कई मरीज

दोनों प्रक्रियाओं के अपने-अपने लाभ हैं। आपके लिए कौन-सा विकल्प बेहतर रहेगा, इसका निर्णय गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट या जीआई सर्जन जांच रिपोर्ट के आधार पर करेंगे।

इलाज के बाद रिकवरी

अधिकांश मरीज उपचार के बाद पहले की तुलना में काफी बेहतर महसूस करते हैं। कई लोगों में खाना निगलने में दिक्कत और खाना गले में फंसना जैसी समस्याएं काफी हद तक समाप्त हो जाती हैं।

रिकवरी के दौरान डॉक्टर की सलाह का पालन करना बहुत जरूरी होता है।

  • शुरुआती कुछ दिनों तक तरल और मुलायम भोजन लें।
  • धीरे-धीरे सामान्य भोजन शुरू करें।
  • भोजन अच्छी तरह चबाकर खाएं।
  • एक साथ ज्यादा भोजन करने की बजाय थोड़ा-थोड़ा करके कई बार खाएं।
  • नियमित फॉलो-अप करवाते रहें।
  • यदि फिर से निगलने में परेशानी शुरू हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

अकलेशिया में क्या खाएं?

सही खानपान उपचार के बाद रिकवरी को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

क्या खाएं?

  • मुलायम और आसानी से निगलने वाला भोजन।
  • दाल, खिचड़ी, दलिया और सूप।
  • दही और दही आधारित खाद्य पदार्थ।
  • अच्छी तरह पकी हुई सब्जियां।
  • पर्याप्त मात्रा में पानी।
  • छोटे-छोटे अंतराल पर भोजन।

किन चीजों से बचें?

  • बहुत सूखा भोजन।
  • जल्दी-जल्दी खाना।
  • बहुत मसालेदार भोजन।
  • बहुत गर्म या बहुत ठंडा खाना।
  • धूम्रपान और शराब।
  • खाना खाते ही लेट जाना।

इलाज कराने पर क्या हो सकता है?

यदि अकलेशिया का समय पर इलाज नहीं कराया जाए, तो कई गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।

इनमें शामिल हैं:

  • लगातार खाना निगलने में कठिनाई
  • तेजी से वजन कम होना।
  • कुपोषण।
  • भोजन फेफड़ों में चले जाने से बार-बार संक्रमण (Aspiration Pneumonia)
  • भोजन नली का अधिक फैल जाना।
  • जीवन की गुणवत्ता में कमी।
  • लंबे समय तक बीमारी रहने पर कुछ मरीजों में भोजन नली के कैंसर का जोखिम सामान्य लोगों की तुलना में बढ़ सकता है। हालांकि यह जोखिम अपेक्षाकृत दुर्लभ होता है।

क्या अकलेशिया पूरी तरह ठीक हो सकता है?

बहुत से मरीज यह सवाल पूछते हैं कि क्या अकलेशिया पूरी तरह ठीक हो सकता है?

वर्तमान में ऐसी कोई दवा उपलब्ध नहीं है जो इस बीमारी को पूरी तरह समाप्त कर दे। लेकिन आधुनिक उपचार जैसे POEM, Heller Myotomy और Balloon Dilatation से इसके लक्षणों को लंबे समय तक प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है।

यदि बीमारी की पहचान समय पर हो जाए और उचित उपचार कराया जाए, तो अधिकांश मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं और अपनी रोजमर्रा की गतिविधियां बिना किसी बड़ी परेशानी के जारी रख सकते हैं।

मुख्य बातें

  • अकलेशिया एक दुर्लभ लेकिन इलाज योग्य अन्ननली की बीमारी है।
  • इसका सबसे सामान्य लक्षण खाना निगलने में दिक्कत होना है।
  • Esophageal Manometry को इसकी पुष्टि के लिए सबसे महत्वपूर्ण जांच माना जाता है।
  • POEM और Heller Myotomy सबसे प्रभावी उपचार विकल्पों में शामिल हैं।
  • समय पर उपचार से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।
  • उपचार के बाद नियमित फॉलो-अप और सही खानपान अच्छे परिणाम के लिए जरूरी हैं।

निष्कर्ष

यदि आपको लंबे समय से खाना निगलने में परेशानी, गले में खाना फंसना, खाना वापस मुंह में आना या बिना कारण वजन कम होने जैसी समस्याएं हो रही हैं, तो इन्हें सामान्य एसिडिटी समझकर नजरअंदाज करें। ये अकलेशिया जैसी गंभीर अन्ननली की बीमारी के संकेत हो सकते हैं।

समय पर अकलेशिया की जांच और विशेषज्ञ डॉक्टर से सही अकलेशिया का इलाज कराने से केवल लक्षणों में राहत मिलती है, बल्कि जीवन की गुणवत्ता भी बेहतर होती है। यदि ऐसे लक्षण लगातार बने रहें, तो जल्द से जल्द गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से परामर्श लें।

FAQs

अकलेशिया क्या होता है?

अकलेशिया भोजन नली की एक बीमारी है, जिसमें खाना और पानी पेट तक आसानी से नहीं पहुंच पाते क्योंकि भोजन नली का निचला वाल्व ठीक से नहीं खुलता।

अकलेशिया के शुरुआती लक्षण क्या हैं?

सबसे सामान्य लक्षण हैं खाना निगलने में दिक्कत, गले में खाना फंसना, सीने में दर्द और खाना वापस मुंह में आना।

अकलेशिया की जांच कैसे होती है?

इसकी जांच के लिए एंडोस्कोपी, Esophageal Manometry और Barium Swallow Test जैसे परीक्षण किए जाते हैं। इनमें Manometry सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है।

क्या अकलेशिया का इलाज बिना ऑपरेशन के हो सकता है?

कुछ मरीजों में दवाइयों या Balloon Dilatation से राहत मिल सकती है, लेकिन कई मामलों में बेहतर और लंबे समय तक परिणाम के लिए POEM या Heller Myotomy की आवश्यकता होती है।

POEM सर्जरी क्या होती है?

POEM एक आधुनिक एंडोस्कोपिक प्रक्रिया है, जिसमें बिना बाहरी चीरे के भोजन नली की जकड़ी हुई मांसपेशियों को ढीला किया जाता है।

अकलेशिया में क्या खाना चाहिए?

मुलायम भोजन, सूप, खिचड़ी, दलिया, दही और पर्याप्त पानी लेना फायदेमंद होता है। भोजन अच्छी तरह चबाकर खाना भी जरूरी है।

क्या अकलेशिया कैंसर है?

नहीं। अकलेशिया कैंसर नहीं है। हालांकि लंबे समय तक इलाज कराने पर कुछ मरीजों में भोजन नली के कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है।

अकलेशिया के लिए किस डॉक्टर से मिलना चाहिए?

यदि आपको निगलने में परेशानी हो रही है, तो गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट या जीआई सर्जन से परामर्श लेना चाहिए।

क्या अकलेशिया दोबारा हो सकता है?

अधिकांश मरीजों में उपचार के बाद लंबे समय तक राहत रहती है। फिर भी कुछ मामलों में समय के साथ दोबारा लक्षण दिखाई दे सकते हैं, इसलिए नियमित फॉलो-अप जरूरी है।

क्या अकलेशिया पूरी तरह ठीक हो सकता है?

हालांकि बीमारी को पूरी तरह खत्म करने वाला उपचार उपलब्ध नहीं है, लेकिन आधुनिक उपचारों से इसके लक्षणों को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है और मरीज सामान्य जीवन जी सकता है।

Mohnish Kataria
Approved By
Dr. Mohnish Kataria
Senior Consultant - GASTROENTEROLOGY

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