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प्रोटीन्यूरिया क्या है? पेशाब में प्रोटीन आने के कारण, लक्षण और इलाज

प्रोटीन्यूरिया क्या है? प्रोटीन्यूरिया क्या है?
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By Dr. Dushiant Sharma in Renal Sciences

Jul 15, 2026

क्या आपने कभी अपनी पेशाब में झाग देखा है या किसी हेल्थ चेकअप की रिपोर्ट में "पेशाब में प्रोटीन" लिखा हुआ पाया है? कई लोग इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि कुछ मामलों में यह आपकी किडनी स्वास्थ्य से जुड़ा एक महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है।

प्रोटीन्यूरिया का मतलब है मूत्र में प्रोटीन का सामान्य से अधिक मात्रा में निकलना। यह अपने आप में हमेशा कोई बीमारी नहीं होती, बल्कि कई बार यह बताती है कि किडनी ठीक तरह से काम नहीं कर रही है या शरीर में कोई अन्य समस्या मौजूद है। अच्छी बात यह है कि समय पर जांच और सही इलाज से अधिकांश मामलों में स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है।

प्रोटीन्यूरिया क्या है?

हमारी किडनी शरीर के खून को फिल्टर करने का काम करती है। सामान्य परिस्थितियों में किडनी शरीर के लिए जरूरी एल्ब्यूमिन जैसे प्रोटीन को खून में ही बनाए रखती है और केवल अपशिष्ट पदार्थों को पेशाब के जरिए बाहर निकालती है।

जब किडनी का फिल्टर कमजोर या क्षतिग्रस्त हो जाता है, तब प्रोटीन भी पेशाब के साथ बाहर निकलने लगता है। इसी स्थिति को प्रोटीन्यूरिया या यूरिन में प्रोटीन कहा जाता है।

हर बार पेशाब में प्रोटीन आना गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता। कभी-कभी तेज बुखार, अधिक व्यायाम, डिहाइड्रेशन या तनाव के कारण भी यह अस्थायी रूप से हो सकता है। लेकिन यदि यह बार-बार या लगातार हो रहा है, तो इसकी जांच कराना जरूरी है।

किडनी का काम क्या होता है?

किडनी हमारे शरीर का प्राकृतिक फिल्टर है। यह खून से विषैले पदार्थों और अतिरिक्त पानी को अलग करके पेशाब बनाती है। साथ ही शरीर में पानी, नमक और खनिजों का संतुलन बनाए रखने में भी मदद करती है।

जब किडनी के फिल्टर यानी ग्लोमेरुलस को नुकसान पहुंचता है, तब मूत्र में प्रोटीन आने लगता है। इसलिए डॉक्टर अक्सर इसे किडनी की शुरुआती समस्याओं का संकेत मानते हैं।

पेशाब में प्रोटीन आने के कारण

प्रोटीन्यूरिया के कारण कई हो सकते हैं।

कुछ कारण अस्थायी होते हैं, जैसे तेज बुखार, शरीर में पानी की कमी, बहुत अधिक व्यायाम, मानसिक तनाव या लंबे समय तक खड़े रहना। इन स्थितियों में समस्या अक्सर अपने आप ठीक हो जाती है।

वहीं कुछ गंभीर कारण भी हो सकते हैं, जिनमें शामिल हैं

  • डायबिटीज
  • उच्च रक्तचाप
  • क्रॉनिक किडनी डिजीज
  • नेफ्रोटिक सिंड्रोम
  • ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस
  • किडनी संक्रमण
  • ल्यूपस जैसी ऑटोइम्यून बीमारी

यदि आपको लंबे समय से डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर है, तो नियमित यूरिन टेस्ट करवाना जरूरी है क्योंकि शुरुआती अवस्था में किडनी की बीमारी के लक्षण दिखाई नहीं देते।

गर्भावस्था में प्रोटीन्यूरिया

गर्भावस्था के दौरान यदि पेशाब में प्रोटीन पाया जाता है, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। कुछ मामलों में यह प्रीक्लेम्पसिया का संकेत हो सकता है, जिसमें ब्लड प्रेशर भी बढ़ जाता है। यह मां और बच्चे दोनों के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।

यदि गर्भवती महिला को सूजन, तेज सिरदर्द, धुंधला दिखाई देना या हाई बीपी के साथ यूरिन में प्रोटीन मिले, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

प्रोटीन्यूरिया के लक्षण

शुरुआती अवस्था में प्रोटीन्यूरिया के लक्षण कई बार दिखाई नहीं देते। इसलिए नियमित हेल्थ चेकअप का महत्व बढ़ जाता है।

जब प्रोटीन की मात्रा बढ़ने लगती है, तब कुछ संकेत दिखाई दे सकते हैं, जैसे

  • झागदार पेशाब
  • पैरों, टखनों या चेहरे पर सूजन
  • आंखों के आसपास सूजन
  • थकान और कमजोरी
  • वजन बढ़ना (सूजन के कारण)
  • हाई ब्लड प्रेशर
  • बार-बार पेशाब आना

यदि ये लक्षण लगातार बने रहें, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

किन लोगों में जोखिम अधिक होता है?

कुछ लोगों में प्रोटीन्यूरिया होने की संभावना अधिक होती है।

इनमें डायबिटीज या हाई बीपी वाले मरीज, मोटापे से ग्रस्त लोग, 60 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति, परिवार में किडनी रोग का इतिहास रखने वाले लोग, गर्भवती महिलाएं और धूम्रपान करने वाले शामिल हैं।

प्रोटीन्यूरिया की जांच कैसे होती है?

यदि डॉक्टर को मूत्र में प्रोटीन होने का संदेह होता है, तो वे कुछ जांच कराने की सलाह देते हैं।

सबसे पहले यूरिन रूटीन टेस्ट और यूरिन प्रोटीन टेस्ट किया जाता है। इसके बाद जरूरत पड़ने पर Albumin Creatinine Ratio (ACR), 24 घंटे का यूरिन टेस्ट, Blood Creatinine, eGFR और Kidney Function Test करवाए जा सकते हैं।

कुछ मामलों में किडनी का अल्ट्रासाउंड या अन्य जांच भी जरूरी हो सकती है।

प्रोटीन्यूरिया का इलाज

प्रोटीन्यूरिया का इलाज उसके कारण पर निर्भर करता है।

यदि समस्या डायबिटीज के कारण है, तो ब्लड शुगर को नियंत्रित रखना सबसे महत्वपूर्ण होता है। हाई ब्लड प्रेशर होने पर उसे नियंत्रित करना जरूरी है। संक्रमण होने पर उसका इलाज किया जाता है।

कुछ मरीजों को डॉक्टर ऐसी दवाएं देते हैं जो किडनी की सुरक्षा करने और यूरिन में प्रोटीन की मात्रा कम करने में मदद करती हैं। किसी भी दवा का सेवन केवल चिकित्सकीय सलाह पर ही करना चाहिए।

 

प्रोटीन्यूरिया में क्या खाएं?

संतुलित और स्वस्थ भोजन किडनी की सेहत बनाए रखने में मदद करता है।

कम नमक वाला भोजन, ताजे फल और सब्जियां, साबुत अनाज, पर्याप्त पानी (डॉक्टर की सलाह के अनुसार) और संतुलित मात्रा में प्रोटीन लेना लाभदायक हो सकता है। यदि पहले से किडनी रोग है, तो डाइट हमेशा नेफ्रोलॉजिस्ट या डाइटिशियन की सलाह के अनुसार रखें।

किन चीजों से बचना चाहिए?

यदि आपको प्रोटीन्यूरिया है, तो बहुत अधिक नमक, प्रोसेस्ड फूड, पैकेज्ड स्नैक्स, मीठे पेय, बिना सलाह प्रोटीन सप्लीमेंट और दर्द निवारक दवाओं का अनावश्यक सेवन करने से बचें।

क्या प्रोटीन्यूरिया से बचाव संभव है?

हर मामले को रोका नहीं जा सकता, लेकिन जोखिम जरूर कम किया जा सकता है।

नियमित हेल्थ चेकअप कराएं, ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखें, स्वस्थ वजन बनाए रखें, धूम्रपान से बचें, नियमित व्यायाम करें और डॉक्टर की सलाह के अनुसार किडनी की जांच कराते रहें।

कब तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए?

यदि आपको कई दिनों तक झागदार पेशाब, पैरों या चेहरे में सूजन, पेशाब में खून, पेशाब की मात्रा कम होना, सांस फूलना, लगातार हाई ब्लड प्रेशर या गर्भावस्था में यूरिन में प्रोटीन मिले, तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करें

मुख्य बातें

  • प्रोटीन्यूरिया किडनी की बीमारी का शुरुआती संकेत हो सकता है।
  • झागदार पेशाब इसका सामान्य लक्षण है, लेकिन हर झागदार पेशाब प्रोटीन्यूरिया नहीं होता।
  • डायबिटीज और उच्च रक्तचाप इसके सबसे सामान्य कारणों में शामिल हैं।
  • शुरुआती पहचान के लिए यूरिन टेस्ट बेहद महत्वपूर्ण है।
  • समय पर इलाज से किडनी को गंभीर नुकसान से बचाया जा सकता है।
  • गर्भावस्था में पेशाब में प्रोटीन मिलने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें।
  • स्वस्थ जीवनशैली किडनी को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में मदद करती है।

निष्कर्ष

पेशाब में प्रोटीन को कभी भी सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह कई बार शरीर की ऐसी समस्या का संकेत होता है जिसका समय रहते इलाज किया जा सकता है। यदि आपकी रिपोर्ट में मूत्र में प्रोटीन आया है या आपको झागदार पेशाब, सूजन या अन्य संबंधित लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो किसी योग्य नेफ्रोलॉजिस्ट से सलाह लें। समय पर जांच, सही इलाज और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर किडनी को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है।

FAQs

प्रोटीन्यूरिया क्या होता है?

प्रोटीन्यूरिया वह स्थिति है जिसमें सामान्य से अधिक मात्रा में प्रोटीन पेशाब के साथ बाहर निकलने लगता है। यह किडनी की कार्यक्षमता में गड़बड़ी का संकेत हो सकता है।

पेशाब में प्रोटीन क्यों आता है?

इसके पीछे डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, किडनी की बीमारी, संक्रमण, डिहाइड्रेशन या अधिक व्यायाम जैसे कारण हो सकते हैं। सही कारण जानने के लिए जांच जरूरी होती है।

क्या झागदार पेशाब हमेशा किडनी की बीमारी का संकेत है?

नहीं। कभी-कभी पानी की कमी या तेज धार से पेशाब आने पर भी झाग बन सकता है। लेकिन यदि यह लगातार हो, तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।

प्रोटीन्यूरिया का इलाज कैसे किया जाता है?

इलाज उसके कारण पर निर्भर करता है। ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करना, संक्रमण का इलाज और डॉक्टर द्वारा दी गई दवाएं स्थिति को सुधारने में मदद करती हैं।

प्रोटीन्यूरिया की जांच कैसे होती है?

यूरिन रूटीन टेस्ट, यूरिन प्रोटीन टेस्ट, ACR टेस्ट, ब्लड क्रिएटिनिन और eGFR जैसी जांचों से इसका पता लगाया जाता है।

क्या प्रोटीन्यूरिया पूरी तरह ठीक हो सकता है?

यदि कारण अस्थायी है, तो यह पूरी तरह ठीक हो सकता है। किडनी की बीमारी होने पर इसे नियंत्रित किया जा सकता है, इसलिए समय पर इलाज जरूरी है।

प्रोटीन्यूरिया में क्या खाना चाहिए?

कम नमक वाला संतुलित भोजन, ताजे फल-सब्जियां और डॉक्टर की सलाह के अनुसार प्रोटीन का सेवन लाभदायक रहता है।

क्या डायबिटीज से पेशाब में प्रोटीन सकता है?

हाँ। लंबे समय तक अनियंत्रित डायबिटीज किडनी को नुकसान पहुंचा सकती है, जिससे यूरिन में प्रोटीन आने लगता है।

गर्भावस्था में पेशाब में प्रोटीन आना कितना गंभीर है?

यह सामान्य भी हो सकता है, लेकिन कई बार प्रीक्लेम्पसिया का संकेत होता है। इसलिए तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।

प्रोटीन्यूरिया होने पर किस डॉक्टर से मिलना चाहिए?

सबसे पहले फिजिशियन से परामर्श लें। यदि किडनी संबंधी समस्या की पुष्टि होती है, तो नेफ्रोलॉजिस्ट आगे की जांच और उपचार की सलाह देंगे।

Dushiant Sharma
Content Written & Approved by
Dr. Dushiant Sharma
Associate Director - UROLOGY

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